@ शब्द दूत ब्यूरो (07 मार्च, 2022)
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम से पहले ही राज्य के दोनों सियासी दलों कांग्रेस और भाजपा के भीतर कशमकश चल रही है। जहां एक ओर साठ पार तो कांग्रेस अड़तालीस सीटो का दावा कर रही है, वहीं हकीकत में दोनों दलों को आशंका है कि छत्तीस के जादुई आंकड़े को छूना मुश्किल हो सकता है। इस बीच उत्तराखंड की राजनीति में 2016 की तोड़फोड़ के मास्टरमाइंड कैलाश विजयवर्गीय की एंट्री ने कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं।
मतगणना की तारीख दस मार्च से पहले ही कांग्रेस और भाजपा में जिस तरह की हलचल देखी जा रही है, सियासी जानकार उसके एक ही मायने निकाल रहे हैं कि 2022 का चुनाव परिणाम इन दोनों ही दलों के दावों को खारिज कर सकता है। इसका आभास शायद इन दलों को हो भी चला है। इसलिए दोनों दल अभी से किसी भी तरह सत्ता तक पहुंचने की कोशिशों में जुट गए हैं।
पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अचानक से सक्रिय होने के बाद से भाजपा ही नहीं कांग्रेस भी भौंचक्की है। निशंक को पहले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली तलब किया। लंबी गुफ्तगू के बाद उत्तराखंड लौटने पर निशंक राज्यपाल से भी मिले।
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की रमेश पोखरियाल निशंक से हुई ताजा मुलाकात के भी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बता दें, कि उत्तराखंड में वर्ष 2016 के चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम में कैलाश विजयवर्गीय बेहद सक्रिय रहे थे। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की नाक में दम कर दिया था।
वैसे विजयवर्गीय को दलबदल की राजनीति का मास्टर भी माना जाता है। राजनीतिक गलियारों में अनुमान लगाया जा रहा है कि 10 मार्च को चुनाव परिणाम आने के साथ ही उत्तराखंड की सियासत में कुछ बड़ा घटित होने वाला है, और रमेश पोखरियाल निशंक के साथ कैलाश विजयवर्गीय इसके सूत्रधार हो सकते हैं।
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