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उत्तराखंड में कांग्रेस का कॉन्फिडेंस और भाजपा की बेचैनी

आगामी 10 मार्च को साफ हो जाएगा कि उत्तराखंड की राजनीति का ऊंट आखिर किस करवट बैठेगा। इस बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों का ही दावा है कि नतीजे उनके पक्ष में रहेंगे। हालांकि इस बार मतदाताओं की चुप्पी से ‘एग्जिट पोल’ के आंकड़े भी गड़बड़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

@विनोद भगत
(18 फरवरी, 2022)

उत्तराखंड में भले ही 10 मार्च तक एग्जिट पोल की मनाही हो, लेकिन भाजपा और कांग्रेस लगातार ये बताने से नहीं चूक रही कि किसकी सरकार बनने वाली है। हरीश रावत के घर बैठ जाने के बयान के बाद से तो उत्तराखंड के राजनीतिक हलकों में एक दूसरे पर बयानबाजियों का दौर थमने का नाम ही नहीं ले रहा।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाल ही में एक बयान दिया कि मुख्यमंत्री बनूंगा नहीं तो घर बैठ जाऊंगा। फिलहाल चुनाव खत्म होने के बाद भी जिस तरह से हरीश रावत रोज नई घोषणाएं कर रहे हैं, उससे उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी की जीत को लेकर वे उत्साहित और आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

दूसरी तरफ, हरीश रावत के इस बयान को भाजपा ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ बता रही है। पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखंड की जनता हरीश रावत को घर बिठाकर ही छोड़ेगी। इस सारे मामले में तमाम टीका-टिप्पणियों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कॉन्फिडेंस देखते ही बनता है।

बाहर से चाहे कितना भी कॉन्फिडेंस हो, लेकिन अंदरखाने भाजपा के भीतर भी एक अनचाही कशमकश तो चल ही रही है। उत्तराखंड की लगभग 30 सीटों पर उसका मुकाबला सीधे कांग्रेस से है। इसके अलावा एन्टी इनकम्बेंसी का खतरा भी भाजपा के नेताओं को परेशान कर रहा है।

इधर, लक्सर के विधायक संजय गुप्ता के वायरल वीडियो का जिन्न भी भाजपा को सता रहा है। विधायक ने ऐन मतदान की शाम को एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर खुला इल्जाम लगाया था कि वे हरिद्वार की कुछ सीटों पर भाजपा प्रत्यशियों को हराने का प्रयास कर रहे थे। अब इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो वे ही जाने, लेकिन भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी में ऐसे प्रकरण गंभीर तो हैं ही।

उत्तराखंड के इस विधानसभा चुनाव में काफी बड़ी संख्या में भाजपाई कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रत्याशियों को गुपचुप मदद भी की। इसको लेकर भी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व काफी परेशान है। भविष्य में अगर राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो भाजपा कार्यकर्ताओं का इधर से उधर जाना कोई नहीं रोक सकता।

उत्तराखंड की कुछ सीटों पर मतदान प्रतिशत की अधिकता को लेकर भी दावों के दौर चल रहे हैं। कांग्रेस मान रही है कि ये राज्य में सरकार बदलने के संकेत हैं। जबकि भाजपा इसे अपनी पांच की उपलब्धि बता रही है। इन सबके बीच महिलाओं की मतदान में बढ़-चढ़कर की गई भागीदारी को कांग्रेस महंगाई से उपजे गुस्से को बता रही है और अपने फायदे गिना रही है।

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