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उत्तराखंड: मुख्यमंत्रियों की फौज बागियों को मनाने में जुटी, 31 के बाद भाजपा कर सकती है निष्कासित

भाजपा का नेतृत्व राजनीतिक आपदा प्रबंधन में जुट गया है। नाराज बताए जा रहे कार्यकर्त्ताओं को साधने के लिए पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ ही सांसदों व पूर्व मुख्यमंत्रियों को मोर्चे पर लगा दिया गया है।

@शब्द दूत ब्यूरो (29 जनवरी, 2022)

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद भाजपा को कुछेक सीटों पर असंतोष के उभर रहे सुरों से दो-चार होना पड़ रहा है। इसे देखते हुए भाजपा नेतृत्व राजनीतिक आपदा प्रबंधन में जुट गया है।

नाराज बताए जा रहे कार्यकर्त्ताओं को साधने के लिए पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ ही सांसदों व पूर्व मुख्यमंत्रियों को मोर्चे पर लगा दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि मनाने के प्रयास सफल नहीं हुए तो 31 जनवरी को नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने पर पार्टी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगी।

पार्टी का मानना है कि यह असंतोष नहीं, बल्कि स्वाभाविक तौर पर क्षणिक गुस्सा है। यद्यपि, पार्टी ने 20 जनवरी को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के तत्काल बाद से ही राजनीतिक आपदा प्रबंधन शुरू कर दिया था। पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों ने नाराज चल रहे नेताओं व कार्यकर्ताओं से निरंतर संपर्क साधकर उन्हें मनाने के प्रयास तेज कर दिए। कुछ कार्यकर्त्ताओं से फोन पर संपर्क साधा गया तो कुछ को देहरादून में प्रदेश कार्यालय में बुलाकर बात की गई।

प्रदेश भाजपा की हाल में हुई बैठक में राजनीतिक आपदा प्रबंधन का जिम्मा यहां के सभी सांसदों को सौंपने का निर्णय लिया गया था। इस बीच पार्टी ने प्रांतीय पदाधिकारियों को भी इस मोर्चे पर लगा दिया था। सूत्रों ने बताया कि अब सांसदों के साथ ही चार पूर्व मुख्यमंत्रियों रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, त्रिवेंद्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत को भी मोर्चे पर लगाया गया है।

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