साल 2007 के विधानसभा चुनाव में नरेंद्रनगर सीट पर घटी उस रोचक घटना को लोग शायद ही कभी भूल पाएं, जिसने तीन वोट से मिली जीत को हार में बदल दिया था।
@शब्द दूत ब्यूरो (27 जनवरी 2022)
साल 2007 और उत्तराखंड की नरेंद्रनगर सीट का विधानसभा चुनाव। इस चुनाव मे नरेंद्रनगर सीट पर घटी उस रोचक घटना को शायद ही लोग कभी भूल पाए होंगे, जिसने तीन वोट से मिली जीत को हार में बदल दिया था। की ओर से सुबोध उनियाल, भाजपा की ओर से लाखीराम जोशी और उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) प्रत्याशी के रूप में ओम गोपाल रावत सहित दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।
चुनाव में प्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला समझा जा रहा था। मतदान के बाद जिला मुख्यालय में मतगणना शुरू हुई। देर रात मतगणना जब अंतिम चरण पर थी, तब कांग्रेस प्रत्याशी सुबोध उनियाल बढ़त हासिल कर सबसे आगे चल रहे थे। स्वयं को हारा हुआ मानकर उक्रांद प्रत्याशी ओम गोपाल रावत मतगणना केंद्र छोड़कर जा चुके थे।
उनके बाद भाजपा प्रत्याशी लाखीराम जोशी ने भी सीट हारी हुई समझकर जगह छोड़ दी थी। क्योंकि लाखीराम जोशी 11808 मतों के साथ तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे। मतगणना केंद्र छोड़ने के बाद भाजपा प्रत्याशी ने कुछ दूर पहुंचने पर ओम गोपाल रावत को बताया कि वह करीबी मुकाबले में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सुबोध उनियाल की मात्र तीन वोट से बढ़त है।
इसके बाद ओम गोपाल रावत मतगणना केंद्र वापस लौटे और फिर से मतगणना की मांग उठा दी। कुछ देर हंगामे के बाद वहां मौजूद रिटर्निंग आफिसर मेहरबान सिंह बिष्ट को दोबारा मतगणना करानी पड़ी।
कांग्रेस प्रत्याशी सुबोध उनियाल जो तीन मतों से चुनाव जीत रहे थे, दोबारा हुई मतगणना में ओम गोपाल रावत से मात्र चार मतों से हार गए। इस चुनाव में ओम गोपाल रावत को 13729 व सुबोध उनियाल को 13725 मत मिले थे।
अब 14 साल बाद इस सीट पर एक बार फिर सुबोध उनियाल भाजपा की ओर से चुनाव मैदान में है। भाजपा से विद्रोह कर ओम गोपाल रावत अब कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या ओम गोपाल रावत फिर से कोई करिश्मा कर पाते हैं या सुबोध उनियाल एक बार फिर इस सीट को बचाने में सफल हो जाएंगे।
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