बुद्धराम का कहना है कि अफसर आए थे। उन्होंने कहा था कुटी में खाना खाएंगे, मजदूर भी लगाए जो आए थे। श्रीमान राज्यपाल जी ने खाना खाया। बाद में सरपंच साहब बोले पंखा हमारा है।
@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (25 दिसंबर, 2021)
आजकल माननीयों के दौरों का दस्तूर है गरीबों के घर खाना खाना। मध्यप्रदेश में विदिशा ज़िले के घाटखेड़ी गांव में रहने वाले बुद्धराम आदिवासी को प्रधानमंत्री आवास के तहत मकान मिला, अगस्त में राज्यपाल ने उनके घर की चाबी सौंपी, वहां खाना खाया। लेकिन अब ये वीआईपी दौरा गरीब बुद्धराम आदिवासी को बहुत महंगा पड़ रहा है।
दरअसल, 24 अगस्त को मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने घाटखेड़ी के बुद्धराम आदिवासी के घर का फीता काटा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बुद्धराम को ये घर मिला था। महामहिम आए थे सो दिखावे का दस्तूर निभाया गया। पंखा, भारी-भरकम गेट लगवाया गया। लेकिन ये आवभगत बुद्धराम को भारी पड़ रही है। अगले ही दिन पंखा निकाल लिया गया और गेट के प्लाइबोर्ड के दरवाजे के लिये 14000 मांगे जा रहे हैं।
बुद्धराम का कहना है कि अफसर आए थे। उन्होंने कहा था कुटी में खाना खाएंगे, मजदूर भी लगाए जो आए थे। श्रीमान राज्यपाल जी ने खाना खाया। बाद में सरपंच साहब बोले पंखा हमारा है। सरपंच साहब बोले सेठ के पास चलो जाओ गेट लगवा लो। सेठजी ने सरपंच से कहा पैसे नहीं आए मेरे पास पैसा नहीं है। मुझे पता रहता इतने का गेट है तो मैं नहीं लगवाता। उनकी रिश्तेदार गोपीबाई ने कहा राज्यपाल साहब आए, कर्जा करवा गये। गेट लगवाये मेहनत करके पूर्ति करेंगे, पंखा भी निकाल ले गये क्या सुविधा मिली कुछ नहीं।”
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