@शब्द दूत ब्यूरो (13 दिसंबर 2021)
काशीपुर । कांग्रेस में टिकट को लेकर दावेदारों की लगातार बढ़ती फेहरिश्त यहाँ नाम फाइनल करने के लिए हाईकमान को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। मौजूदा हालात तो यही कह रहे हैं। इसके बावजूद एक नाम जो इस वक्त सबसे आगे है वह यहाँ से महानगर अध्यक्ष संदीप सहगल का है ।
वैसे कई नेता खुद को विजयी मानकर हाईकमान के समक्ष अपना दावा पेश कर रहे हैं। ऐसे में यहाँ से किसी एक नाम पर सहमति बना पाना और उसके बाद पार्टी के अन्य दावेदारों को बागी होने से रोकना एक बड़ कवायद होगी। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल महानगर अध्यक्ष संदीप सहगल के नाम पर गंभीर मंथन चल रहा है। दरअसल संदीप सहगल पिछले लंबे समय से काशीपुर में कांग्रेस की कमान संभाले हुए हैं। सहगल के पीछे कार्यकर्ताओं का एक बड़ा तबका है यह बात हाईकमान भी जानता है। बाकि दावेदारों को लेकर जीत की गारंटी नहीं है। एक सूत्र के मुताबिक संदीप सहगल पहली बार चुनाव लड़ेंगे जबकि अन्य दावेदारों में कुछ ऐसे नाम हैं जो कोई न कोई चुनाव लड़कर हार चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस बार कांग्रेस हाईकमान काशीपुर में किसी तरह का रिस्क लेने के पक्ष में नहीं है। बीस वर्षों की रणनीति यहाँ कामयाब नहीं हो पाई और लगातार कांग्रेस को एक के बाद एक पराजय का मुंह देखना पड़ा है। पार्टी का आंतरिक सर्वे भी यहाँ से कुछ ऐसा ही हुआ है। सूत्र बताते हैं कि अन्य दावेदार के मुकाबले संदीप सहगल की जीत के प्रतिशत के मामले में अव्वल हैं। पर एक दो दावेदारों ने दबी जुबान से जता दिया कि वह टिकट न मिलने की दशा में चुनाव मैदान में बागी ही सही पर उतरेंगे जरूर। ऐसे में अब इस बात पर मंथन हो रहा है कि ऐसी परिस्थिति में वह पार्टी को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं।
काशीपुर में इस वक्त जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर है। खासकर मौजूदा विधायक हरभजन सिंह चीमा से यहाँ का मतदाता नाराज है। यह कहा जा सकता है कि 2022 के रण में भाजपा यहाँ से सत्ता विरोधी लहर की काट के लिए किसी निर्विवाद चेहरे को चुनाव मैदान में उतार सकती है। कांग्रेस को देखना होगा कि कौन पार्टी के लिए चुनावी टिकट चाहता है और कौन सिर्फ अपने लिए टिकट चाहता है।
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