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बड़ा सवाल :76 वर्षों में 95 यात्री विमान और सेना के 1751 विमान क्रैश हुये, आखिर वजह क्या है? एक विश्लेषण

@शब्द दूत ब्यूरो (9 दिसंबर 2021)

दुनिया के साठ देशों में मिग 17 सीरीज के 12 हजार से ज्यादा हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाता है।  क्योंकि इसकी गिनती दुनिया के सबसे आधुनिक एवं सुरक्षित हेलीकॉप्टर में होती है। 

खराब मौसम और विपरीत परिस्थितियों में भी ऑपरेट होने वाले इस हेलीकॉप्टर को लैंडिंग के लिए हैलिपेड की जरूरत नहीं होती। ये ऊबड़-खाबड़ जगहों पर आसानी से उतरने वाले इस हेलीकॉप्टर का उपयोग ट्रांस्पोर्टेशन, रेस्क्यू ऑपरेशन, तलाशी अभियान और वीवीआईपी लोगों के आवागमन के लिए किया जाता है। इस हेलीकॉप्टर में एक बार में 3 क्रू मेंबर  के अलावा 36 लोग बैठ सकते हैं साथ ही ये हेलीकॉप्टर अधिकतम 13 हजार किलोग्राम का वजन उठा सकता है।  देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी जब घरेलू उड़ान पर जाते हैं तो इसी हेलीकॉप्टर का उपयोग करते हैं। भारत में इस समय ऐसे 150 हेलीकॉप्टर हैं। ये हेलीकॉप्टर 2011 से 2018 के बीच भारत में आये हैं। रूस में इन हेलीकॉप्टर को निर्मित किया गया है। 

ये बड़ी दुखद आश्चर्य की बात है कि देश के इतिहास में पहले सीडीएस की उसके ही हेलीकॉप्टर में मृत्यु हो जाती है। वर्ष 1948 से 2021 के बीच यानी पिछले 73 वर्षों में सेना के 1751 एयरक्राफ्टस और हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुके हैं। यानी इस हिसाब से हर वर्ष औसतन 24 और हर महीने सेना के 2 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। अगर बात सिर्फ वर्ष 1994 से 2014 के बीच की करें तो इस दौरान भारतीय सेना के 394 एयरक्राफ्टस और हेलीकॉप्टर क्रैश हुए हैं। यानी इस दौरान हर साल औसतन 20 विमान दुर्घटना का शिकार हो गए।

भारत में प्रति दिन 4 से 5 हजार यात्री विमान उड़ान भरते हैं, जिनमें लाखों यात्री एक जगह से दूसरी जगह सफर करते हैं। जबकि एक अनुमान के मुताबिक सेना में प्रति दिन ट्रेनिंग और दूसरे कामों के लिए लगभग 200 विमान ही उड़ान भरते हैं। इसके बावजूद यात्री विमानों की तुलना में सेना के विमान ज्यादा क्रैश होते हैं। वर्ष 1945 से 2021 के बीच पिछले 76 वर्षों में 95 यात्री विमान ही क्रैश हुए हैं।जबकि इसी अवधि में सेना के 1751 विमान क्रैश हो चुके हैं। 

आमतौर पर दुनिया के किसी भी देश में जब कोई यात्री विमान क्रैश होता है तो उस विमान में तकनीकी खामियों की तुरंत जांच होती है और कई मामलों में जांच होने तक उस सीरीज के यात्री विमान के इस्तेमाल पर बैन भी लगा दिया जाता है। जैसे वर्ष 2018 में बोइंग 737 मैक्स सीरीज के 2 यात्री विमान क्रैश हो गए थे, जिसके बाद भारत समेत ज्यादातर देशों ने इनके इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था। लगभग 1.5 साल तक ये विमान रनवे पर खड़े रहे थे। लेकिन सेना में ऐसा नहीं किया जाता।  भारत में वर्ष 2012 तक मिग सीरीज के 872 में से 482 विमान क्रैश हुए। आधे से ज्यादा विमान क्रैश होने के . बावजूद इनका इस्तेमाल कई दशकों तक हुआ

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