पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा पीड़ित राज्य और केदार क्षेत्र की भावी योजनाओं को लेकर कोई स्वीकृतियां और धन देने की घोषणा नहीं की। उल्टा हमारी परंपराओं व मान्यताओं को रौंदकर चले गए।
@शब्द दूत ब्यूरो (06 नवंबर, 2021)
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की चुनाव समिति के प्रमुख हरीश रावत ने प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ आगमन पर धाम की मर्यादाएं और परंपराओं के टूटने की बड़ी बात कही है। उन्होंने पीएम के दौरे को उत्तराखंड के लिए निराशाजनक भी बताया है।
सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने लिखा, ” देश के प्रधानमंत्री के केदारनाथ आगमन का मैंने स्वागत किया था। मगर अब में निराश हूं। उन्होंने उत्तराखंड, आपदा पीड़ित राज्य और केदार क्षेत्र की भावी योजनाओं को लेकर कोई स्वीकृतियां और धन देने की घोषणा नहीं की। उल्टा हमारी परंपराओं व मान्यताओं को रौंदकर चले गए।
हरीश रावत ने लिखा, “बड़े-बड़े नेता आए, महामहिम राष्ट्रपति भी आए, इंदिरा गांधी भी आई, राहुल गांधी पैदल चलकर के आए. मुख्यमंत्री तो आते रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार केदारनाथ गया। हर बार गर्भगृह में भगवान केदारनाथ के सामने ध्यानस्थ भी रहा, लेकिन हमको उस क्षण की फोटो खींचने और लाइव प्रसारित करने की हिम्मत नहीं हुई। रावल और केदारनाथ मंदिर समिति ने जो लक्ष्मण रेखा खींची थी, हमने हमेशा उसका आदर किया।”
हरीश रावत ने कहा, “लेकिन इस बार गर्भगृह से प्रधानमंत्री ने अपने को लाइव टेलीकास्ट करवाया। फेसबुक लाइव और दूसरे चैनलों में यह सब कुछ टेलीकास्ट हुआ। मंदिर के प्रांगण से राजनैतिक उद्देश्य को लेकर भाषण किया गया। उसको सरकारी संचार माध्यमों से प्रसारित किया गया।”
हरीश रावत ने आगे लिखा, “अब मैं अपने उन साथियों की सलाह के लिए उनको धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझसे कहा कि आप उनके आगमन का स्वागत कर गलत कर रहे हो। वास्तव में गलती हो गई। गर्भगृह की मर्यादा भी टूटी, देवस्थान में राजनीति न हो उसकी भी मर्यादा टूट गई। मगर शिकायत करें तो किससे करें? उलटा उत्तराखंड को कुछ हासिल नहीं हुआ। न आपदा को लेकर उत्तराखंड को कोई सहायता दी गई और न केदारनाथ में रोपवे सहित किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान की गई। केदार बाबा क्षमा करें।”
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