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उत्तराखंड: समय के साथ फीकी पड़ गई नैनीताल की खूबसूरत मोमबत्तियों की चमक

नैनीताल विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता हैं। नैनीताल अपनी झील और सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि नैनीताल डिज़ाइनर मोमबत्ती कारोबार के लिए भी जाना जाता है।

@शब्द दूत ब्यूरो (04 नवंबर, 2021)

झीलों की नगरी नैनीताल की बनी कलात्मक मोमबत्तियों की मांग देश ही नहीं वरन विदेशों में भी रहती थी। पर समय के साथ नैनीताल का मोमबत्ती लघु उद्योग दम तोड़ गया है। बीस सालों के भीतर ही इन लघु उद्योगों की संख्या 120 से घटकर अब मात्र 10 रह गई है। इससे न सिर्फ स्थानीय रोजगार प्रभावित हुआ बल्कि नैनीताल की एक बड़ी पहचान भी खोती जा रही है।

दरअसल मोम के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि व समय के साथ चायना व अन्य महानगरों की प्रतिस्पर्धा के सामने नैनीताल का मोमबत्ती लघु उद्योग टिक नहीं पाया। इस कारण मोमबत्तियां बनाने वाले ज्यादातर पेशेवर लोग यहां से कारोबार समेट चुके हैं।

पर्यटक यहां से मोबत्तियां लेकर देशभर में जाते थे। इस कारण मोमबत्तियों की मांग काफी अधिक रहती थी। पर समय के साथ यहां के कारोबार प्रतिस्पर्धा के साथ ही बाजार के आगे पिछड़ गए हैं। सरकार की ओर से भी यहां कोई प्रोत्साहन नहीं दिया गया। ऐसे में अब 90 फीसदी से अधिक लोग अपना काम बंद कर चुके हैं।

नैनीताल में मोमबत्ती का कारोबार करीब पचास साल पुराना है। करीब 1970 में जर्मनी से मशीन मंगाने के बाद यहां सजावटी कैंडल का कारोबार होने लगा। मोमबत्तियों की मांग बढ़ने लगी तो कई लोगों ने उसका कारोबार शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पर्यटकों की पहली पसंद के साथ ही मोमबत्तियां लोगों की कमाई का अहम हिस्सा बन गयी। टी लाइट, नेचुरल दीया, फ्लावर, अरोमा कैंडल, पानी में तैरने वाली मोमबत्तियां बाजार में छा गयी।

अब बाजार में एपण वाली मोमबत्तियां भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की खुशबू व डिजाइन वाली मोमबत्तियां भी यहां उपलब्ध रहती हैं। पर दीपावली में अब एलईडी लाइट की ज्यादा सजावट होती है इस कारण मोमबत्तियों की मांग में कमी आई है।

 

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