@शब्द दूत ब्यूरो (15 अक्टूबर, 2021)
उत्तराखंड में ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आ रहे हैं, नेताओं की जुबानी जंग से सियासत गरमाने लगी है। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर स्टिंग की सियासत गरमाने वाली है।
पूर्व मुख्यमंत्री व एआईसीसी के महासचिव हरीश रावत ने स्टिंग के तार छेड़े हैं। उन्होंने अपनी फेसबुक पर लिखकर भाजपा को चुनौती दी, हो जाए एक बार.. भाजपा का स्टिंग बनाम मेरा स्टिंग।
सियासी जानकारों के मुताबिक, हरीश रावत को इस बात का एहसास है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की सियासत जोर पकड़ेगी, स्टिंग की सियासत गरमाएगी। उन्हें अंदेशा है कि 2022 के चुनाव से पूर्व उनके स्टिंग को लेकर विरोधी कांग्रेस और उनको निशाना बना सकते हैं। शायद ही इसी आशंका में उन्होंने अचानक स्टिंग का शिगूफा छोड़ा है।
हरीश रावत ने बेहद काव्यात्मक अंदाज में पोस्ट लिखी, खनन प्रेमी हैं मुख्यमंत्री हमार, कर्मकार बोर्ड के घोटाले से न होत शर्मसार। उज्याडू बल्द को बाखरी से बड़ा दुलार, स्टिंग स्टिंग कहने से पहले याद कर लो टीएसआर, कम ऑन भाजपा। हो जाए एक बार भाजपा का स्टिंग बनाम मेरा स्टिंग। आओ रेंजर्स ग्राउंड देहरादून में दोनों स्टिंग्स, जिसमें मेरा व भाजपा स्टिंग को बड़े पर्दे पर दिखाएं। मेरे पास एक व्यक्ति ताजमहल बेचने आया, मैंने उसके नाम अमेरिकन फेडरल बैंक कर दिया।
प्रदेश भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री की पोस्ट पर पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि प्रदेश में शराब व खनन को उद्योग के रूप में चलाने वाले आज उपदेशक बन रहे हैं। प्रदेश की जनता को पूर्ववर्ती सरकार के कारनामों की पूरी खबर है।
पार्टी ने कहा कि विरोधियों को आरोप प्रत्यारोप के जरिये भ्रमजाल फैलाने से बचकर हकीकत को स्वीकार करना चाहिए। पूर्व सीएम को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस स्टिंग को दिखाने की बात कर रहे है। क्योंकि पूर्ववर्ती सरकार के कुछ स्टिंग जनता ने देखे और कुछ सार्वजनिक नहीं हो पाए तो वह उन उपलब्धियों को भी सार्वजनिक कर सकते हैं।
भाजपा ने कहा कि कांग्रेस में चल रही उठापटक और घमासान से कांग्रेस नेता हताश और निराश हैं और इसके चलते उन्हें अब कुछ नहीं सूझ रहा है। हताशा में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति के बूते सत्ता का ख्वाब देखने वाली कांग्रेस को अस्तित्व के लिए फिर जूझना होगा।
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