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काशीपुर विधानसभा सीट हलचल :यूँ ही नहीं की चीमा ने पुत्र की दावेदारी की घोषणा, सीट का समीकरण उनके पक्ष में, अन्य दावेदारों पर पड़ेंगे भारी

@शब्द दूत ब्यूरो (9 अक्टूबर 2021)

काशीपुर । आगामी विधानसभा चुनाव के लिए क्या काशीपुर विधानसभा सीट से एक प्रत्याशी का नाम लगभग फाइनल है? हालांकि दावेदारों की लंबी चौड़ी फेहरिश्त सामने आ रही है।

भारतीय जनता पार्टी सत्ताधारी दल है इसलिए उसके दावेदारों को लेकर लोग ज्यादा उत्सुक हैं। मौजूदा विधायक हरभजन सिंह चीमा के चुनाव न लड़ने और अपने पुत्र त्रिलोक सिंह चीमा को पार्टी की ओर प्रत्याशी बनाये जाने की खबर के बाद यहाँ स्थानीय भाजपा के अन्य दावेदारों के माथे पर बल पड़ गये हैं। ऐसे में टिकट से पहले घमासान शुरू हो गया है। इस घमासान से पार्टी को आने वाले समय में नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इससे पहले भी चीमा को टिकट मिलने पर अन्य दावेदार बेचैन रहे हैं लेकिन पार्टी अनुशासन के चलते आखिरकार स्थानीय नेताओं का बस नहीं चल पाया। एकमात्र पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल जरूर चीमा के सामने बागी प्रत्याशी के रूप में सामने मैदान में डट गये। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पार्टी से खुलेआम विद्रोह के बावजूद राजीव अग्रवाल पुन: भाजपा में ससम्मान वापस ले लिये गये। परंतु पार्टी के विधायक हरभजन सिंह चीमा का वह लगातार विरोध करते रहे।

यहाँ खास बात यह है कि राजीव अग्रवाल के अतिरिक्त सिर्फ मौजूदा मेयर ऊषा चौधरी ही भाजपा की वह नेता हैं जिन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर निकाय चुनाव में जीत हासिल की और भाजपा की ही प्रत्याशी को शिकस्त भी दी। बाद में वह भी भारतीय जनता पार्टी में ससम्मान वापस ले ली गईं। मतलब साफ है कि काशीपुर में भाजपा के लिये कोई त्याज्य नहीं है। 

अब इधर भाजपा के कुछ और दावेदारों ने ताल ठोकनी शुरू कर दी है। इस सूची में प्रदेश मंत्री आशीष गुप्ता, उत्तराखण्ड सहकारिता यूनियन के चेयरमैन व वरिष्ठ नेता राम मेहरोत्रा, पार्षद गुरविंदर सिंह चंडोक, प्रदेश चिकित्सा प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ गिरीश तिवाड़ी ये वो नाम हैं जो अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। 

विधायक हरभजन सिंह चीमा कुछ समय पहले तक चुनाव लड़ने के लिए जोर शोर से तैयारी में लगे हुये थे। लेकिन बीते रोज उन्होंने खुद को अलग करते हुए अपने पुत्र त्रिलोक सिंह चीमा को मैदान में लाकर सबको भौचक्का कर दिया। चीमा की इस दावेदारी के पीछे यह माना जा रहा है कि इस बारे में हाईकमान से उन्हें हरी झंडी मिल गई है। बीस वर्षों के अपने राजनीतिक अनुभव के चलते चीमा की ओर से की इस दावेदारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 

दरअसल उत्तराखंड में कम से कम एक सिख को टिकट अवश्य देना है। काशीपुर विधानसभा सीट पिछले बीस वर्षों से जिताऊ सीट रही है भाजपा के लिए। ऐसे में पार्टी यहाँ से कोई रिस्क नहीं लेगी। रहा सवाल त्रिलोक सिंह चीमा को कौन जानता है? इस सवाल के कोई मायने नहीं है। आज की राजनीति में भाजपा और मोदी ये दो फैक्टर ऐसे हैं कि इनके लिए यह सवाल बेमानी होगा। बहरहाल काशीपुर विधानसभा सीट के समीकरण टिकट की दावेदारी के लिहाज से फिलहाल चीमा के पक्ष में हैं। 

 

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