@विनोद भगत
काशीपुर । विधायक हरभजन सिंह चीमा इधर एकाएक राजनीति में एक बार फिर से सक्रिय हो चुके हैं। राजनीति में तो वह सक्रिय हैं ही पर इधर पिछले दिनों स्वास्थ्य कारणों से वह सार्वजनिक रूप से कम सामने आ रहे थे। ऐसे में समझा जा रहा था कि चीमा इस बार शायद ही विधानसभा चुनाव लड़ें।
पिछले एक सप्ताह से जिस तरह विधायक चीमा सार्वजनिक रूप से सामने आये हैं और लगातार सुर्खियों में आ रहे हैं उससे विपक्षी से ज्यादा उनके अपने ही दल के नेता भीतर ही भीतर ज्यादा परेशान हैं। उस पर विधायक चीमा का यह कहना कि उन्होंने कभी भी टिकट की दावेदारी नहीं की उन्हें 2002 के बाद उनके कामकाज पर पार्टी ने टिकट दिया है। मतलब साफ है कि चीमा बता रहे हैं कि यहाँ भाजपा की उन्हें जरूरत नहीं वरन भाजपा को उनकी जरूरत है।
उधर अधिकारियों की बैठक बुलाकर विधायक चीमा ने यह संकेत देने का प्रयास किया है कि वह जनहित के लिए प्रयासरत हैं। दरअसल फ्लाईओवर को काशीपुर के लिये अपने कार्यकाल की उपलब्धियों में चीमा शुमार करना चाहते हैं। फ्लाईओवर निर्माण में देरी का सारा ठीकरा दीपक बिल्डर्स पर फोड़ते हुये चीमा ने जनता की नजर में यह दिखाने की कोशिश की कि उनके प्रयासों में कोई कमी नहीं है।
दरअसल हरभजन सिंह चीमा ही एकमात्र ऐसे प्रत्याशी हैं जो काशीपुर विधानसभा में भाजपा की जीत की गारंटी हैं। इसमें सच्चाई उनके बीते चुनाव की परिस्थितियों को देखकर समझा जा सकता है। चार बार विधायक बनते आ रहे चीमा के कई चुनावों में जीत को लेकर खुद पार्टी के ही नेता भीतर ही भीतर आशंकित रहते थे लेकिन परिणाम चीमा के पक्ष में ही आये। मतलब चीमा की जीत के चक्रव्यूह को भेद पाना संभव नहीं हुआ।
बात करें चीमा के कार्यकाल के विकास की तो आपको आश्चर्य होगा कि चीमा ने जिस तरह से अपने विकास कार्य से जनता या यूँ कहें अपने वोट बैंक को मजबूत किया है वह उनकी मजबूत चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है। चीमा ने छोटी छोटी पाकेट में काम कराये। जहां एक हजार से लेकर दो हजार तक के वोटर हैं। ऐसे क्षेत्रों में सड़कों की बेहतर व्यवस्था कर उन्होंने अपना वोट बैंक सुरक्षित रखा है। आप कहते रहिये कि फ्लाईओवर निर्माण में देरी का दोषी चीमा है।
भाजपा के टिकट पर लड़ने की वजह से उन्हें कैडर वोट मिलना स्वाभाविक है। उधर 25 से 30 हजार की संख्या में पर्वतीय वोटर हरभजन सिंह चीमा के लिये बोनस के रूप में है। वैसे काशीपुर विधानसभा में यह माना जाता है कि पर्वतीय वोटरों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के पाले में है।
खास बात यह है कि विधायक हरभजन सिंह चीमा को हाईकमान की ओर से हरी झंडी मिल चुकी है। हालांकि कुछ अन्य नेता भी यहाँ से खुद को टिकट मिलने का दावा करते नजर आ रहे हैं लेकिन पार्टी का मानना है कि जीत का घर हरभजन सिंह चीमा है। भाजपा के ही एक नेता कहते हैं कि आयेगा तो मोदी ही की तर्ज पर टिकट लायेगा तो चीमा ही।
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