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रामनगर में बेबिनार का आयोजन, प्रकृति के संरक्षण पर विशेषज्ञों ने किये विचार साझा

@शब्द दूत ब्यूरो (4 अगस्त 2021)

रामनगर। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामनगर और ग्लोबल लीडर फाउंडेशन के संयुक्त तत्त्वाधान में एक वेबिनार “प्रकृति के संरक्षण और सतत विकास के लिए ग्लोबल गो ग्रीन” पर आयोजित की गई। 

वेबिनार में मुख्य अतिथि पूर्व वाइस चांसलर गुजरात एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी व पदम् श्री डॉक्टर एमएच मेहता ने कहा की उनका उत्तराखंड के साथ विशेष लगाव हे उन्होंने कहा की भू स्खलन काफी बड़ी समस्या है। उन्होंने इको एग्रीकल्चर प्रैक्टिस, बायो फ़र्टिलाइज़र , बायो कम्पोस्ट और आर्गेनिक फार्मिंग विषय पर अपनी बात कही ।

उन्होंने कहा की मृदा की उपयुक्तता व् गुणवत्ता के हिसाब से पेड़ो का चुनाव करना चाहिए ताकि पेड़ लम्बे समय तक मिटटी के कटाव को रोकने में समर्थ हों। पद्मश्री डॉ एम एस मेहता द्वारा गो ग्रीन तथा ऑर्गेनिक खेती की विस्तृत चर्चा एवं जानकारी साझा की गई जिसमें उन्होंने जलवायु परिवर्तन का मिट्टी की उपयोगिता पर प्रभाव एवं पहाड़ों में भूमि कटाव पर विशेष चिंता व्यक्त की तथा भू कटाव को रोकने के लिए प्लांटेशन की महत्ता पर जोर दिया जिसमें सीडबॉल टेक्निक को प्रयोग कर पर्वतीय क्षेत्र में वृक्षारोपण किया जा सकता है तथा नमामि गंगे वाटर मैनेजमेंट पर विचार साझा की किए जिसमें उन्होंने नदियों के बहाव से भूमि कटाव को रोकने के लिए नदी के दोनों और वृक्षारोपण पर जोर दिया जिससे आने वाली जनरेशन इको ग्रीन जनरेशन पर काम कर सके ।

वेबिनार में वक्ताओं ने कहा की हिमालय क्षेत्र के साथ छेड़खानी नहीं की जानी चाहिए । हिमालय बचेगा तभी देश बचेगा रामनगर क्षेत्र हिमालय की तलहटी के शिवालिक रेंज में आता हे । कोसी नदी के कारण भी भूमि का कटाव हो रहा है बरसात के मौसम में सड़क कई बार पहाड़ो का मलबा आने के कारण बंद हो जाती हे । वेबिनार में जैव विविधता विषय पर भी प्रकाश डाला गया । उन्होंने कहा की वन विभाग, एनजीओ , शिक्षण संसथान के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के उपाय किये जा सकते हैं ।
औद्योगिकीकरण के कारण पर्यावरण को जो नुकसान हुये हैं उस पर भी विचार किये जाने की जरूरत हे । आज की परिस्थितियों के कारण ही हम प्रदूषण के कारण प्राकृतिक नुकसान का खामियाजा भुगत रहे हैं हमे प्राकृतिक संसाधनों के महत्त्व को समझना होगा ।
प्रोफेसर एमसी पांडेय ने कहा की हमे भविष्य के लिए लम्बी सोच , एक बड़ा अभियान और एक्शन प्लान की जरूरत है।

उन्होंने कहा की पहाड़ की तलहटी में बसा रामनगर भाबर व कोर्बेट टाइगर रिज़र्व का क्षेत्र हे 14 एकड़ कैंपस में रामनगर पी जी कॉलेज है। उन्होंने कहा कि अगर एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन पर सभी मिलकर कार्य करेंगे तो हम बेहतर कार्य कर सकते हैं रिसर्च स्टूडेंट्स और कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व मिलकर अवेयरनेस प्रोग्राम चला सकते हैं ।

उन्होंने वेबिनार के आयोजक डॉ किरण कुमार पंत और ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ भावना पंत के प्रयासों को सराहनीय बताया। इन परियोजनाओं का क्रियान्वन हो सके इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा ।

प्रोफेसर पीके पाठक संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड ने कहा की रामनगर डिग्री कॉलेज के प्राचार्य व सभी सहयोगियों के प्रयास की प्रशंसा करता हूँ कि उनके द्वारा लगातार वेबिनार व ऑनलाइन टीचिंग के माध्यम से लगातार प्रयास किये जा रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि 60 प्रतिशत क्षेत्र वन आच्छादित है हम ग्लोबल ग्रीन एन्वायरमेंट का कार्य कर रहे हैं। प्रकृति की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास किये जाने की जरूरत है। उन्होंने हरेला पर्व पर प्रकाश डालते हुए उसके महत्व को बताया कि हमे प्रकृति को हरा भरा बनाये रखने की जरूरत है। ताकि हमारे पहाड़ व् जंगल बचे रहें प्रकृति का संरक्षण अनिवार्य हे हमे इस दिशा में कार्य करने की जरूरत है।

ग्लोबल लीडर फाउंडेशन के चेयरमैन रमेश त्रिपाठी ने कहा की एनपीके फ़र्टिलाइज़र के प्रभाव के कारण अर्थ वर्म बहुत नीचे चला जाता हे जिससे अर्थ की वाटर रिटेनिंग कैपेसिटी कम हो जाती हे । आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने के लिए धरती को केमिकल कंपाउंड से बचाना होगा ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण केवल चिंतन का विषय नहीं है अपितु सम्पूर्ण सामर्थ्य के साथ उसे बचाने का अंतिम अवसर है।

अति उपभोग व्यवहार व पर्यावरण के प्रति उदासीन दृष्टिकोण ही इसके लिए जिम्मेदार है। वृक्ष लगाने के साथ साथ उनके रख रखाव का भी ध्यान रखना नितांत आवश्यक है। आज वृक्षारोपण का कार्य एक सेल्फी प्रोग्राम बन कर रह जाता है।

वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी गणेश रावत ने कहा की यह एक प्रासंगिक ज्वलंत विषय है । पृथ्वी सबसे सुंदर गृह है हवा, पानी, ऑक्सीज़न ही हमारे जीवन का आधार है । आज दिनों दिन हमारी हवा मिटटी व् पानी प्रदूषित होती जा रही हे मनुष्य को विचार करने की जरूरत है। विकास की रणनीति कुछ इस तरह बनानी होगी जिससे धरती का प्राकृतिक संतुलन बना रहे।

ऑर्गेनिक फार्मिंग के विशेषज्ञ जी एस ग्रेवाल ने ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए अपने विचार साझा किए उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती है जिससे स्वास्थ पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसलिए ऑर्गेनिक खेती को अपनाने की जरूरत है। वहीं दिल्ली से चार्टेड एकाउंटेंट- डॉ ओम प्रकाश शर्मा एवम् रामनगर के कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध रिनेसा कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर व मीडिया कॉर्डिनेटर – गिरीश चन्द्र शर्मा भी वेबिनार में शामिल हुए। विभिन्न राज्यों के प्रोफेसर, रिसर्च स्काॅलर और विद्यार्थी वेबिनार का हिस्सा बने व पर्यावरण सुरक्षा एवं संरक्षण विषय पर अपने विचार साझा किए।

 

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