@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (18 जुलाई, 2021)
ईरान में एक गांव है चेहराबाद। यहां पर पुरातत्व विज्ञानियों को एक 1600 साल पुरानी भेड़ की ममी मिली है। वैज्ञानिकों ने इस भेड़ की ममी से प्राचीन डीएनए निकाला है, जिससे कई नए खुलासे हुए हैं।
पुरातत्व विज्ञानियों का मानना है यह भेड़ एक खदान में काम करने वाले भूखे मजदूरों द्वारा लाई गई होगी। कुछ हिस्सा खाने के बाद उन्होंने इसके पैर को छोड़ दिया। जो प्राकृतिक तौर पर ममी बन गई। जिसकी वजह से इसके बाल, मांसपेशियां, डीएनए और हड्डी अब तक सुरक्षित रहे। यह भेड़ पांचवीं या छठी सदी की मानी जा रही है।
डबलिन स्थित ट्रिनिटी कॉलेज के स्मरफिट इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक्स के रिसर्च फेलो केविन डेली ने कहा कि भेड़ की यह टांग बेहद उम्दा तरीके से ममी बनी थी। इसके किसी भी हिस्से को कोई नुकसान नहीं हुआ है. इसमें से डीएनए निकालने में हमें कोई दिक्कत नहीं आई। डीएनए भी एकदम सुरक्षित है। हम इस डीएन की लगातार स्टडी कर रहे हैं। भेड़ की इस टांग पर कुछ नमक पसंद करने वाले माइक्रोब्स भी पैदा हुए हैं। हम उनका अध्ययन भी कर रहे हैं। यह स्टडी 13 जुलाई को बायोलॉजी लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हुई है।
भेड़ की इस ममीफाइड पैर को पुरातत्वविदों ने उत्तर-पश्चिम ईरान के चेहराबाद में स्थित एक प्राचीन नमक की खान से निकाला है। इसी खान में वर्ष 1993 में कई इंसानों के सुरक्षित शव मिले थे। तब 8 इंसानी ममी मिली थीं, इनमें से कइयों के त्वचा और बाल एकदम सुरक्षित थे। इसलिए उन्हें सॉल्टमैन कहा गया था। माना जाता है कि इन इंसानों की ममी की उम्र 1300 से 2500 साल रही होगी।
स्मरफिट इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक्स के डॉक्टोरल स्टूडेंट और स्टडी के पहले लेखक कोनोर रोसी ने कहा कि यह खान अद्भुत है। यहां बहुत ज्यादा नमक है, नमी कम है। इसलिए यहां दबे जीवों की त्वचा और बाल सदियों तक सुरक्षित रहते हैं। साथ ही इनके डीएनए को भी नुकसान नहीं पहुंचता। डीएनए पर सैप्रोफाइटिक माइक्रोब्स का हमला नहीं होता। ये ऐसे माइक्रोब्स होते हैं जो मुर्दा और सड़ रहे जैविक पदार्थों को खाते हैं।
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