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उत्तराखंड :दस विधायकों में से नेता प्रतिपक्ष नहीं चुन पाई कांग्रेस सत्ता का सिर्फ ख्वाब ही देख सकती है

@विनोद भगत

उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस का दावा है कि इस बार वह सत्ता पर काबिज होने जा रही है। लेकिन जिस तरह से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनने में कांग्रेस के पसीने छूट गये हैं और उससे लेटलतीफ  कांग्रेस के दावों का खोखलापन सामने आ रहा है। एक माह बीत चुका है कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष डॉ0 इंदिरा हृदयेश के निधन को । लेकिन मात्र दस विधायकों में से एक नेता प्रतिपक्ष चुन पाना उत्तराखंड कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो गया है।

प्रदेश में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में इस कदर मतभेद है कि हाईकमान भी उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष का निर्णय नहीं ले पा रहा है। नेता प्रतिपक्ष चुनने में इतनी देर लगाने वाली कांग्रेस के पास आगामी चुनावों में चेहरे तो कई हैं पर हर चेहरे पर आम राय नहीं बन पा रही है। आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मीडिया को बताया कि यहाँ चुनाव सामूहिक नेतृत्व पर लडा जायेगा। इसका सीधा मतलब है कि कि किसी एक नेता का नाम तय करने के बाद यहाँ घमासान छिड़ जायेगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व एआईसीसी सदस्य योगेंद्र खंडूरी ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह़्दयेश के निधन के एक महीने बाद भी नए नेता प्रतिपक्ष के चयन पर कुछ नहीं हो पाया है। उधर प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर असहज स्थितियां बन रही हैं। इसलिए जल्द से जल्द इस पर निर्णय ले लिया जाना चाहिए। इसका आगामी विधानसभा चुनाव में सकारात्मक असर नजर आएगा।

इधर चुनाव से पहले यहाँ भाजपा और आम आदमी पार्टी को सक्रिय हो चुकी है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने  सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने कोर्डिनेशेन कमेटी की आपात बैठक बुला ली।

प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह आज सुबह ही दिल्ली रवाना हो गए। पूर्व सीएम हरीश रावत भी दिल्ली में ही हैं। राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन भी दिल्ली पहुंच गए हैं। कमेटी के बाकी 10 सदस्य भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना चाहती है। नेता प्रतिपक्ष और नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी कांग्रेस ज्यादा दिन सस्पेंस बनाए नहीं रखना चाहती। जिस प्रकार प्रदेश में बाकी राजनीतिक दल सक्रिय हैं, उसमें इस लेटलतीफी का कांग्रेस को ही नुकसान हो रहा है।

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