@शब्द दूत ब्यूरो ।1 जुलाई
काशीपुर कांग्रेस की राजनीति का केंद्र बिंदु कई वर्षों तक बना रहा। दिग्गज कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी के दौर में काशीपुर न केवल प्रदेश वरन देश की राजनीति की धुरी रहा। एकबारगी तो यहां के सर्वमान्य नेता नारायण दत्त तिवारी प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जाने लगे। लेकिन एन डी तिवारी की हार के बाद कांग्रेस शासनकाल से काशीपुर विकास की दौड़ में बहुत पीछे चला गया। उस दौर में औद्योगिक विकास की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ी लेकिन आज काशीपुर की हालत अपनी विकास की कहानी खुद ही बयां करती नजर आ रही है।
काशीपुर के कांग्रेसी नेता देश और प्रदेश के नेताओं की अगवानी करने तक ही सीमित रह गये। सत्येंद्र चंद्र गुड़िया के बाद यहाँ से प्रदेश स्तर का कोई ऐसा चेहरा नहीं उभर पाया जिसे प्रदेश की राजनीति में नामचीन चेहरा माना जाये।
पर इधर उत्तराखंड की कांग्रेसी राजनीति में एक नया मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं। काशीपुर निवासी आर्येन्द्र शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की सुगबुगाहट चल रही है। राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है। दरअसल प्रीतम सिंह को अगर नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता है है तो प्रदेश अध्यक्ष के लिए एक ब्राहमण चेहरे की दरकार है। यदि प्रीतम सिंह नेता प्रतिपक्ष चुने गए तो आर्येन्द्र शर्मा को यह जिम्मेदारी मिल सकती है।
आर्येन्द्र शर्मा नारायण दत्त तिवारी सरकार में मुख्यमंत्री के सलाहकार रह चुके हैं। एन डी तिवारी के साथ रहने के कारण आर्येन्द्र शर्मा की दिल्ली की राजनीति में भी सीधी पकड़ है। वहीं प्रीतम सिंह भी उनके नाम पर सहमत होंगे। माना जा रहा है कि उनके अध्यक्ष बनने पर पार्टी में आपसी मतभेदों की गुंजाईश भी नहीं रहेगी।
काशीपुर की कांग्रेसी राजनीति भी इससे प्रभावित होगी। अगर यह कहा जाये कि काशीपुर की राजनीति में कांग्रेस की कमजोरी पूरे प्रदेश में प्रभावी हो रही है तो गलत नहीं होगा। काशीपुर मैदानी क्षेत्र की राजनीति का केंद्र बिंदु है। कांग्रेस को यहाँ अपनी स्थिति सुधारने के लिए कोई बड़ा दांव लगाने की जरूरत है। 
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