देहरादून। पुलिस का चेहरा मानवीय भी होता है। अपराधियों के लिए भले ही उन्हें कठोर बनना पड़ता है और यह जरूरी भी है। लेकिन मासूम और मजलूमों के लिए पुलिस मददगार भी होती है।
यहाँ राजधानी के घंटाघर पर सब इंस्पेक्टर शिशुपाल राणा ड्यूटी पर तैनात थे इसी बीच उन्होंने दो मासूमों को टूटी साईकल में कुछ भुट्टे बेचते देखा। दोनों बच्चे आते-जाते लोगों को भुट्टे खरीदने के लिए आवाज लगा रहे थे।
एस आई शिशुपाल राणा दोनों बच्चों के पास पहुंचे और भुट्टे बेचने का कारण पूछा, तो बच्चों ने बड़ी मासूमियत के साथ जवाब दिया कि भुट्टे बेचकर जो मिलेंगे वे उन पैसों को घर जाकर अपनी माँ को देंगे जिससे उनकी माँ उनके लिए राशन लाएगी। बच्चों की मजबूरी और मासूमियत भरा जवाब सुनकर सब इंस्पेक्टर राणा ने तुरंत बिना जरूरत ही बच्चों से उनके पास मौजूद 10 भुट्टे 200 रुपये में खरीद लिए और बच्चों को मास्क देकर उनके घर वापस भेजा। पुलिस का यह रूप देखकर बच्चों ने थैंक्यू अंकल कहते हुए माँ को पैसे देने के लिए खुशी-खुशी घर की तरफ दौड़ लगा दी। 

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