@विनोद भगत
काशीपुर । मैं एल डी भट्ट राजकीय चिकित्सालय हूँ। पिछले कुछ दिनों से मुझे वीआईपी जैसा फील होने लगा है। सभी राजनेता यहाँ तक कि मंत्री सासंद विधायक मेयर रोज मेरे हालातों का जायजा लेने आ जाते हैं। पहले गाहे-बगाहे इक्का-दुक्का राजनेता ही मेरे ढिंग आया करते थे। वैसे भी मैं लगभग चिकित्सक विहीन, निष्प्रयोज्य ट्रामा सेंटर युक्त आदर्श चिकित्सालय हूँ। लेकिन मुझे गर्व है कि कई नामी चिकित्सकों को मैंने ट्रेनिंग दी और फिर आज वह सरकार पर निर्भर न होकर आत्मनिर्भर बनकर अपने नर्सिंग होम बनाये बैठे हैं। एक ऐसे चिकित्सक से जो मुझे छोड़कर जा रहे थे मैंने पूछा क्या कमी थी मुझमें? वह इतना ही बोले मुंह मत खुलवाओ मेरा ।
खैर मैं बात कर रहा था खुद की। कोविड के दौरान मेरा बहुत ख्याल सरकार की ओर रखा जा रहा है। यहाँ तक कि अब मुझे आदर्श चिकित्सालय बनाने की बात हो रही है। मुझे हंसी आ रही है। कोविड न होता तो मुझे आदर्श चिकित्सालय भी नहीं बनाया जाता। मतलब आपदा में मुझे अवसर मिला है। पर ऐसे आश्वासन तो मैं पिछले कई वर्षों से सुन रहा हूँ। दरअसल मैं रैफर सेंटर हूँ इसका प्रमाण मेरे परिसर के बाहर खड़ी तमाम एंबुलेंस को देखकर लगाया जा सकता है। चलो किसी के रोजगार का साधन तो मुझे बनाया गया है सरकारों के द्वारा।
अब डाक्टर पूरे होते सभी सुविधाएं होती पर्याप्त मेडिकल उपकरण होते तो इन एंबुलेंस के रोजगार का साधन कैसे हो पाता। बहरहाल कुछ समाजसेवियों ने जिस तरह से मेरे हालात पर तरस खाकर मुझे संवारने का प्रयास किया उसके लिए मैं आभारी हूं। लेकिन कुछ हालत सुधरने के बाद तो सरकार खुद मेरे द्वार आने लगी और अधिक सुविधाओं का आश्वासन देना शुरू कर दिया। आश्वासन तो सरकारें पिछले कई वर्षों से देती आ रही है और वह मात्र आश्वासन ही बने रहे।
मैं काशीपुर का एल डी भट्ट राजकीय चिकित्सालय अब तक आश्वासनों के सहारे ही हूँ। यही मेरी बेचारगी है। 

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