हल्द्वानी । रचनात्मकता किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। तिमिला ग्राम रानीखेत के मूल निवासी(वर्तमान में हल्द्वानी) 82 वर्षीय आनंदबल्लभ पपनै पिछले लंबे समय से अपनी कविताओं और रामलीला का काव्यात्मक वर्णन करते आ रहे हैं। उनका द्वारा लिखी गई रामलीला का मंचन अल्मोड़ा देहरादून समेत कई स्थानों पर हो चुका है।
अब आनंद बल्लभ पपनै (सेवानिवृत्त अध्यापक) ने स्व रचित व बहुचर्चित ठेठ कुमाऊनी भाषा में कुमाऊनी रामलीला”रामलिल” को यू ट्यूब पर प्रस्तुत किया है। एके पिक्चर यू ट्यूब चैनल पर उन्होंने सम्पूर्ण रामलीला का कुमाऊंनी भाषा में सुंदर वर्णन किया है। 

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