भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात हवाई साबित हुई
उत्तरकाशी मे अपर जिलाधिकारी सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन भी है
विनोद भगत
राज्य की त्रिवेंद्र सरकार का भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस का आज मखौल उस समय उड़ता नजर आया जब भूमि मुआवजा घोटाले में फंसे एक पीसीएस अधिकारी को पुनः भूमि मुआवजा वितरण में तैनाती दे दी गई। बाजपुर के एसडीएम रहे पीसीएस अधिकारी तीरथ पाल पर एन एच 74 घोटाले में उन पर इस दौरान किसानों से साठगांठ कर कई गुना अधिक मुआवजा दिलाने के मामले में बैक डेट में जमीन की प्रकृति बदल कर सरकार से करोड़ों रुपये का हेरफेर करने का आरोप था। तत्कालीन कुमायूं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन की ओर से सौंपी गई अनुपूरक जांच में उस समय तीरथ पाल इस घोटाले में संलिप्त पाये गये थे। घोटाले में इनके नाम आने के बाद एस आई टी ने उन पर शिकंजा भी कस दिया था। बाद में तीरथ पाल ने एस आई टी के समक्ष समर्पण किया था। इस मामले में वह जेल में भी रहे थे। तब से बाध्य प्रतीक्षा में चल रहे तीरथ पाल को आज उत्तरकाशी के अपर जिलाधिकारी के पद पर तैनाती दे दी गई है।
आल वैदर रोड का काम चल रहा है। इसमें भी मुआवजा बंटना है। याद दिला दें कि उत्तरकाशी में अपर जिलाधिकारी सक्षम भू अर्जन अधिकारी भी होते हैं। ऐसे में जिसके विरूद्ध पहले से ही भूमि मुआवजा घोटाले के आरोप हों उसे पुनः उसी महकमे में तैनात करना कौन से भ्रष्टाचार पर रोक लगायेगा। यह सवाल तो खड़ा हो रहा है। वैसे भी मौजूदा सरकार का एन एच 74 घोटाले पर नरम रवैया सरकार की मंशा को जाहिर करने के लिए काफी है। 
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