@विनोद भगत
काशीपुर । कोरोना महामारी के दौर में सबसे ज्यादा दबाव अगर किसी पर पड़ा है तो वह चिकित्सक है। चिकित्सकों इन दिनों जिम्मेदारी के साथ-साथ अपने पेशे की साख बचाने का भी दबाव पड़ रहा है। समाज की सेवा के संकल्प के साथ चिकित्सक ने जब इस पेशे में कदम रखा था। तब शायद सोचा भी न होगा कि महामारी के इस संकट काल में जहाँ एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें सर्वप्रथम कोरोना वॉरियर्स का तमगा देकर सम्मानजनक पदवी से विभूषित कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग चिकित्सकों का मनोबल तोड़ने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।
सवाल यह है कि क्या यह समय उचित है जब चिकित्सकों को इस तरह से प्रताड़ना का शिकार बनाया जाये? शब्द दूत ने शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ रजनीश कुमार शर्मा से इस बारे में विस्तार से बात की। डॉ रजनीश शर्मा कहते हैं कि पैथी के नाम पर किसी भी चिकित्सक की उपलब्धियों को कम करके आंकना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता है। यह सही है कि एलोपैथी अपने आप में पूर्ण चिकित्सा विज्ञान नहीं है। यही बात आयुर्वेद और होम्योपैथी के बारे में कही जा सकती है। डॉ रजनीश बताते हैं कि एलोपैथी में बहुत से रोगों का इलाज नहीं हो सकता। एलोपैथी उपचार में उपयोग होने वाले कई साधन तो एलोपैथी के अंतर्गत नहीं आते इसके बावजूद उन साधनों को एलोपैथी चिकित्सक ही प्रयोग कर सकते हैं।
डॉ रजनीश शर्मा मानते हैं कि एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद के बीच जो लकीर खींच दी गई वह नहीं होनी चाहिए। किसी भी दवाई पर किसी पैथी का कापीराइट होना ही नहीं चाहिये। उदाहरण के लिए किसी आपरेशन से पहले उपचाराधीन मरीज को बेहोश करने के लिए जो इंजेक्शन लगाया जाता है या फिर नींद की दवा दी जाती है वह किसी पैथोलॉजी से संबंधित नहीं माना जाना चाहिए। पैथी का मतलब एंटीबायोटिक होना चाहिए। वहीं वह इस मामले में रामदेव के योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने की कोशिशें की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह ओवर कान्फिडेंस का शिकार है। बात सही कही लेकिन व्यक्त करने का तरीका उचित नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए डॉ रजनीश शर्मा ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सको को भी अब सर्जरी की अनुमति दे दी गई है। डॉ रजनीश शर्मा कहते हैं कि अगर किसी मरीज को खून चढ़ाना पड़ता है तो वह तो हर डाक्टर चढ़ा सकता है इसे एलोपैथी में नहीं माना जाना चाहिए। किसी मरीज को अगर विटामिन सी की कमी है और गैर एलोपैथी डाक्टर उसे विटामिन सी की गोली लिख दे तो क्या यह माना जायेगा कि उस चिकित्सक ने अपनी सीमा तोड़ कर विटामिन सी की गोली मरीज के लिए लिख दी। दवाओं को किसी एक पैथी का कॉपीराइट नहीं होना चाहिए।
डॉ रजनीश शर्मा ने कहा कि योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा एलोपैथी पर आक्षेप करना अनुचित है। किसी मरीज को ग्लूकोज़ की बोतल लगाना, खून चढ़ाया जाना आक्सीजन देना किसी विशेष पैथी में नहीं आते। वहीं सोरायसिस का इलाज केवल आयुर्वेद में ही है। तो हार्ट अटैक के समय एलोपैथी ही याद आती है। वैक्सीनेशन को लेकर डाक्टरों की मौत होने सबंधी बयान को डॉ रजनीश शर्मा ने सही बताते हुए कहा कि ऐसा हुआ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वैक्सीनेशन न कराया जाये। कई बार किसी की प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है तो वह बिना वैक्सीन के भी स्वस्थ है। इसके बावजूद डॉ रजनीश शर्मा लोगों से एहतियात बरतने मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने सैनिटाइजेशन करने की जरूरी बताया।
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