@विनोद भगत
काशीपुर । बीस सालों तक भारतीय जनता पार्टी के चहेते बने रहे विधायक हरभजन सिंह चीमा ने अपनी पीड़ा क्या व्यक्त कर दी, उन्हें पार्टी के ही लोगों ने ही अलग थलग छोड़ दिया। अलबत्ता दूसरे दलों ने अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष हरभजन सिंह चीमा को सलाह देना शुरू कर दिया। भाजपा ने चीमा के तेवरों को लगता है कोई खास महत्व नहीं दिया है।
कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने तो यह कह दिया कि विधायक चीमा ने ऐसा कोई बयान दिया है उन्हें मालूम ही नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह के प्रबल समर्थक मनीष वर्मा ने विधायक चीमा पर गुमराह करने का आरोप मढ़ दिया। दरअसल 57 विधायकों के प्रचंड बहुमत से सत्तासीन भाजपा पर अकाली दल के इस एकमात्र विधायक की नाराजगी कोई फर्क नहीं डालती।
अगर बात करें काशीपुर विधानसभा से भाजपा के टिकट पर आगामी चुनाव में प्रत्याशी को लेकर तो माना यह जा रहा कि इस बार यहां से हरभजन सिंह चीमा को प्रत्याशी बनाने के मूड में भाजपा नहीं है। मौजूदा मेयर श्रीमती ऊषा चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है।
चुनाव लड़ने की इच्छा के बारे में पूछे जाने पर विधायक चीमा पिछले कई दिनों से गोलमोल जबाब दे रहे थे। पार्टी टिकट देगी तो मैं चुनाव लड़ूगा। और साथ में यह कहना नहीं भूलते कि मैं बीस वर्षों से भाजपा के टिकट पर जीतता आ रहा हूं। लेकिन बीते रोज विधायक चीमा ने खुल कर जिस तरह मुख्यमंत्री पर निशाना साधा वह बताता है कि उन्हें इस बात का भान हो गया है टिकट का मामला गड़बड़ी में पड़ गया है। यहाँ एक बात जरूर ध्यान देने योग्य है कि पिछले कई वर्षों से काशीपुर की भाजपाई राजनीति में विधायक चीमा और मेयर श्रीमती ऊषा चौधरी एक दूसरे के राजनीतिक सहयोगी रहे हैं। इस दौरान विधायक चीमा ने भाजपा के किसी अन्य राजनीतिक नेता को इतना महत्व नहीं दिया।
विधायक चीमा के बयान के बाद कई भाजपा नेता जो लंबे समय से टिकट की आस में थे उनके चेहरे खिल गये हैं पर लगता है कि चीमा की लगातार जीत की तरह काशीपुर में भाजपा को मेयर ऊषा चौधरी के रूप में में लगातार जीतने वाला संभावित चेहरा मिल गया है। 


Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal