देहरादून। भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे सीटू और किसान सभा के कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज किए जाने की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि मजदूरों-किसानों की विभिन्न जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जिलाधिकारी,देेहरादून के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना आलोकतांत्रिक एवं जन विरोधी कार्यवाही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रांतीय पदाधिकारी,सांसद और अन्य नेता गण खुलेआम सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य सरकारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए घूम रहे हैं। भाजपा के कई पदाधिकारी तो कोरोना संक्रमित हो कर प्रदेश में घूमते रहे हैं। लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्यवाही पुलिस या प्रशासन नहीं कर रहा है।
इसके विपरीत शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में पुलिस अत्याधिक तत्परता दिखा रही। सरकार में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति हो,यह अलग बात है। लेकिन पुलिस भी राजनीतिक संबद्धता देख कर मुकदमा करने का निर्णय ले यह बेहद निंदनीय है। भाकपा माले सचिव ने कहा कि हम उत्तराखंड सरकार से यह मांग करते हैं कि पुलिस को राजनीतिक विरोधियों के दमन के औज़ार के रूप में प्रयोग करना बंद करे ।
भाकपा(माले) मांग करती है कि सीटू और किसान सभा के कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएँ। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाये कि विपक्षी पार्टियों के नेताओं-कार्यकर्ताओं पर पक्षपातपूर्ण तरीके से मुकदमा दर्ज करने के इस सिलसिले पर रोक लगे।

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