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दिल्ली में भड़की हिंसा कपिल मिश्रा की वजह से,भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने भी लिया नाम, पार्टी बैकफुट पर आयी

@वेद भदोला

नई दिल्ली। सीएए को लेकर हिंसक हुये आंदोलन में एक पुलिस कर्मी सहित सात लोगों की मौत के बाद भी पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा की बयानबाजी पर विपक्ष के साथ भाजपा नेता भी सवाल उठा रहे हैं। 

दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने एक बयान में कहा कि किसी को भी चाहें कपिल मिश्रा ही क्यों न हों? भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए। नार्थ ईस्ट दिल्ली में आंदोलन तब हिंसक हो गया जब इस कानून के समर्थन में भाजपा नेता कपिल मिश्रा भी आमने-सामने आ गये। और पुुलिस कमिश्नर के सामने कपिल मिश्रा ने चेतावनी दी। अब तक इस हिंसा में दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल सहित 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा लोग घायल हैं। दिल्ली के मौजपुर, जाफराबाद, बाबरपुर और गोकलपुरी क्षेत्र में पिछले दो दिन से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। 

दिल्ली में भड़की हिंसा के बाद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा विपक्ष के निशाने पर हैं। आम आदमी पार्टी उनके खिलाफ शिकायत लेकर उपराज्यपाल के पास पहुंची तो एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिंसा में गई जानों के लिए मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है. खुद बीजेपी के सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने अपने बयान में कपिल मिश्रा का नाम लेकर कहा कि जो भी हिंसा भड़काने का जिम्मेदार हो, उसपर एक्शन होना चाहिए। 

चारों तरफ से घिरता देख कपिल मिश्रा खुद भी अब बैकफुट पर हैं और ट्वीट के जरिए शांति की अपील कर रहे हैं। कपिल मिश्रा की सड़कों पर उतरने के समय से मोदी सरकार के लिए ही असहज स्थिति पैदा हो गई। माान जा रहा है कि कपिल मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को भले ही चेतावनी दी है लेकिन दिल्ली पुुुलिस गृह मंत्रालय के आधीन है। एक तरह से यह चेतावनी गृहमंत्री को मानी जा रही है। कपिल मिश्रा ने अनजाने में ही यह काम किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के दिल्ली दौरे के बीच कपिल मिश्रा का यह कदम सरकार और पार्टी के लिए किरकिरी पैदा कर गया। उससे भी अहम ये कि इस हिंसा को भड़काने वालों में सबसे पहला नाम उन्हीं की पार्टी के नेता कपिल मिश्रा का लिया जा रहा है। 

इस मामले में दिल्ली बीजेपी भी बैकफुट पर आ गई है। शाहीन बाग के प्रदर्शन और जामिया हिंसा के लिए आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक अमानतुल्लाह खान को जिम्मेदार बताती रही है। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अमानतुल्लाह के बहाने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमकर निशाना बनाया था लेकिन उत्तर पूर्वी इलाके में हुई हिंसा में तो अब उसी के विधानसभा चुनाव उम्मीदवार कपिल मिश्रा सवालों के घेरे में हैं। 

 बात कहाँ से बिगड़ी? 

जब दिल्ली के जाफराबाद में मेट्रो स्टेशन के आधी रात में सीएए के खिलाफ महिलाएं धरने पर बैठ गईं और सड़क जाम कर दी। इसके चलते मौजपुर और यमुना विहार जाने वाला रास्ता बंद हो गया। तब कपिल मिश्रा एक ट्वीट करते हैं कि जाफराबाद के जवाब में’ सड़क पर उतरना जरूरी हो गया है। 

इतना ही नहीं रविवार को दोपहर बाद कपिल मिश्रा अपने समर्थकों के साथ मौजपुर चौक की रेड लाइट पर पहुंचे और सीएए के समर्थन में धरने पर बैठ गए। पुलिस बल पहुंचा तो कपिल मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया। 

कपिल मिश्रा ने कहा, ‘ये यही चाहते हैं कि दिल्ली में आग लगी रहे। इसीलिए इन्होंने रास्ते बंद कर दंगे जैसा माहौल बना रहे हैं। हमारी तरफ से एक भी पत्थर नहीं चला है।कपिल मिश्रा ने डीसीपी को संबोधित करते हुए कहा कि  डीसीपी साहब, आप सबके सामने खड़े हैं। मैं आप सबकी ओर से ये बात कह रहा हूं कि ट्रंप के जाने तक तो हम शांति से जा रहे हैं। लेकिन उसके बाद हम आपकी भी नहीं सुनेंगे अगर रास्ते खाली नहीं हुए तो. ठीक है?

कपिल मिश्रा ने कहा था, ‘ट्रंप के जाने तक आप (डीसीपी) जाफराबाद और चांद बाग खाली करा लीजिए, ऐसी आपसे विनती कर रहे हैं, उसके बाद हमें रोड पर आना पड़ेगा। भारत माता की जय।वंदे मातरम्। इसी के बाद दिल्ली में जाफराबाद समेत कई जगह हिंसा भड़क गई।

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