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काशीपुर : गिन्नीखेड़ा गांव में शौचालय समेत कई अन्य निर्माण कार्यों में भारी घोटाला, ग्रामीणों ने बतायी अपनी व्यथा, देखिये काला सच वीडियो में

@नवल सारस्वत की रिपोर्ट 

काशीपुर। एक तरफ सरकार शौचालय निर्माण को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है। शौचालय तो बने गांवों में बने पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार और जनता के बीच गलतफहमियों की दीवार खड़ी कर दी। सरकारी पैसे की इस कदर बंदरबांट की कि ग्रामीणों में सरकार के विरूद्ध माहौल बनने लगा। हालांकि यह खुुलासा सूचना के अधिकार से हुआ। लेकिन जब गाँव में जाकर ग्रामीणों से मिलकर बात की गई तो वास्तविक स्थिति बड़ी हैरतअंगेज निकली।

काशीपुर के निकट स्थित ग्राम गिन्नीखेड़ा में सरकारी योजनाओं की हकीकत का काला सच सामने आया।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में उनसे शौचालय अपने खर्चे पर बनवाने को कहा। साथ ही शौचालय के निर्माण के बाद बाकायदा उनके फोटो खींचकर भेजे गए। लेकिन दो साल बीतने के बाद ही शौचालय निर्माण के 12000 रूपये आज तक उन्हें नहीं मिले। यहाँ तक कि पैसे दिलवाने के नाम पर कई परिवारों से ढाई सौ से तीन सौ रुपये तक फाइल चार्ज के नाम पर वसूले गये। 

मामले की शिकायत सीएम पोर्टल पर भी की गई थी। लेकिन जांच तो वही अधिकारी करेंगे जिनके रहते ये धांधली और घोटाले हुये। हालांकि बीडीओ द्वारा कर जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है। पर क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी ये भी जांच  विषय बनेगा। 
 दरअसल ग्राम गिन्नीखेड़ा निवासी ब्रजपाल सिंह ने गांव में हुए वर्ष 2016-17 से वर्ष 2019-20 तक निर्माण कार्यों की सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी मांगी थी। उपलब्ध कराई गई सूचना में जो निर्माण कार्य गांव में दर्शाये गए हैं वह गांव में हुए ही नहीं है। तब ब्रजपाल सिंह ने निर्माण कार्यों में धांधली की सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।

ब्रजपाल ने बताया गांव में मात्र तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे जो कि वर्षों से खराब पड़े हैं। वहीं दो लाख 10 हजार लागत की तीन सोलर लाइटें सार्वजनिक स्थानों पर लगाने का उल्लेख मांगी गई सूचना के जवाब में किया गया है। लेकिन कहीं लगी नहीं है। जबकि उपलब्ध सूचना में वर्ष 2018-19 में नए हैंडपंप के लिए 48 हजार और 20 हजार रुपये दिए गए हैं। साथ ही 13 हजार 200 रुपये मानदेय भी निर्गत हुआ है। वहीं वर्ष 2019-20 में हैंडपंप के लिए पचास हजार और पंचायत भवन रंगाई-पुताई व मरम्मत के लिए 1 लाख 80 हजार का भुगतान करना दर्शाया गया है। साथ ही 20 हजार रुपये मानदेय भी निर्गत करना दिखाया गया है। लेकिन एक भी कार्य गांव में नहीं हुआ है।

उधर शब्द दूत को ग्रामीण महेंद्री, सुमन, महेश सिंह, राजपाल, जयपाल सिंह, राजोदेवी, सरोज आदि ने बताया गांव में लगभग 250 शौचालय वर्ष 2018-19 में बनाए गए थे। तब उनसे 250 से 300 रुपये लेकर कहा गया था कि उनके खाते मेें 12 हजार रुपये आ जाएंगे। ग्रामीणों ने बताया उन्होंने अपने खर्चे से शौचालय बनवा लिए, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हुआ।

अगर बारीकी से जांच की जाये तो गिन्नीखेड़ा ही नहीं कई अन्य गांवों में ऐसी धांधली और घोटाले सामने आयेंगे। जिनकी रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।

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