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देश में ताकतवर और कमजोर के लिए अलग-अलग कानून व्यवस्थाएं नहीं हो सकतीं: सुप्रीम कोर्ट

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (23 जुलाई, 2021)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में दो समानांतर न्याय व्यवस्थाएं नहीं हो सकती जो एक अमीर और शक्तिशाली और राजनीतिक पहुंच वाले लोगों के लिए हो और दूसरा संसाधन से वंचित आम आदमी के लिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के दमोह स्थित अडिशनल सेशन जज पर एसपी और दूसरे पुलिस अधिकारियों की तरफ से दबाव बनाने के मामले को गंभीरता से लिया है। डीजीपी को पूरे मामले की एक महीने के भीतर जांच का आदेश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की हत्या मामले में मध्यप्रदेश से बीएसपी विधायक रमाबाई के पति गोविंद सिंह की जमानत रद्द कर दी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की बुनियाद है और उसमें किसी भी तरह का राजनीतिक दखल व दबाव नहीं होना चाहिए। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका लोकतंत्र की बुनियाद है और उसे तमाम राजनीतिक और अन्य तरह के बाहरी दबावों से मुक्त होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत न्यायपालिका का कार्य और उसकी शक्तियां अलग है। न्यायपालिका बिल्कुल स्वतंत्र होकर काम करे यही अवधारणा है। किसी भी बाहरी बाधा या दबाव के बिना ज्यूडिशियरी और जज काम करें और विवाद को सुलझाने में उन्हें सक्षम होना चाहिए और इसके लिए इस बात की जरूरत है कि जज स्वतंत्र रूप से काम करें।

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