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मिसाल :शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती,बुलंद हौसले से कमला रावत ने इंटर में हासिल की सफलता

@शब्द दूत ब्यूरो( 31जुलाई 2021)

@शशांक राणा

चमोली। मन में कुछ करने की ठान लो और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो हर नामुमकिन राह भी मुमकिन हो जाता है। ऐसी ही एक मिसाल पेश कर अपनी लगन, मेहनत और हौसलों से कमला रावत ने वो कर दिखाया है जो बिना इच्छाशक्ति के नही हो सकता । सुना था पढ़ने और सीखने की कोई उम्र नही होती इसको सही साबित कर दिखाया गांव की एक साधारण गृहिणी कमला रावत ने। 34 वर्षीय कमला रावत के तीन बच्चे हैं। एक लड़की 14 साल की और 12 व 10 साल के दो लड़कों की मां कमला रावत की इस सफलता पर पूरे क्षेत्र को गर्व है। 

उन्होंने बताया कि जब मैं अविवाहित थी तब मैंने आठवीं पास किया था। बेहद गरीबी और स्कूल दूर होने के कारण मैं आगे नहीं पढ़ पाई जबकि मैं पढ़ना चाहती थी। मेरे साथ के सभी सहपाठियों ने आगे पढ़ाई जारी रखी इस बात का मुझे बहुत अफसोस था कि मैं नहीं पढ़ पाई, समय बीतता गया फिर शादी हो गई। ससुराल में भी सारी जिम्मेदारी निभानी होती है मेरे बच्चे भी काफी बड़े हो गए थे कुछ वर्ष पहले ही हमारे गांव में प्राथमिक विद्यालय मेड़ ठेली में एक शिक्षक की कमी थी। ग्राम प्रधान एवं सभी ग्रामीणों की आपसी सहमति से कुछ महीने मैंने वहां पर बच्चों को पढ़ाया।

उसी दौरान विद्यालय की प्रधानाध्यापिका  से बात हुई। क्योंकि उनको भी विश्वास नहीं था कि मैं आठवीं पास थी। तब उन्होंने मुझे आगे पढ़ने का सुझाव दिया जो मेरे लिये असंभव भी था मन में पढ़ने की इच्छा भी थी। क्योंकि आज के समय में पढ़ाई बहुत जरूरी है। खासकर बेटियों के लिए मेरे बच्चे उस समय खुद छठवीं आठवीं कक्षा में पढ़ रहे थे। कमला रावत ने बताया कि हाईस्कूल के बाद आज आखिरकार 12वीं पास करने के बाद पहले का अपना पढ़ने का सपना साकार किया।

कमला रावत ने कहा कि एक घरेलू महिला और गृहणी होने के नाते महिला पर घर का सारा काम-काज, बच्चों की देख तथा खेती बाड़ी सब कुछ जिम्मेदारी होती है। थोड़ा बहुत गांव एवं क्षेत्र के हित में समाज सेवा करने की कोशिश करती हूं जितना मुझसे संभव हो पाता। मैं चाहती हूं कि समाज में भी एक अच्छा संदेश जाए। ताकि शिक्षा से कोई वंचित न रहे खासकर बेटियां चाहे कोई भी परिस्थितियां आए।

ठेली गांव की महिलाओ द्वारा कमला रावत का सम्मान किया गया ममता बिष्ट मछखोला ने बताया कि कमला रावत उनकी गांव की भाभी हैं और उन्हें आज उन पर बहुत गर्व हैं कि उन्होंने उनके गांव को एक नई पहचान दिलवाई है।

 

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