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क्या कोरोना की तीसरी लहर को रोक सकता है भारत

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (25 जुलाई, 2021)

भारत ने अब धीरे-धीरे खुलना शुरू कर दिया है। अप्रैल और मई में कोरोना की दूसरी ‘बेहद भयंकर’ लहर ने देश में भारी तबाही मचाई, लेकिन जून में संक्रमण की दर कम होती देख प्रशासन ने अधिकांश राज्यों में कोरोना से संबंधित प्रतिबंध या तो हटा लिए हैं या बहुत मामूली प्रतिबंध लागू हैं। जबकि जानकार कह रहे हैं कि कोरोना की तीसरी लहर अगले कुछ ही महीने में दस्तक दे सकती है। बल्कि कुछ विशेषज्ञों ने तो कहा है कि तीसरी लहर 10-12 हफ़्ते में ही आ सकती है।

भारतीय अदालतों ने राज्य सरकारों से उनकी तैयारियों को लेकर सवाल किए हैं। ज़्यादातर लोगों में कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर चिंता है। कुछ का मानना है कि नया ‘डेल्टा प्लस’ वेरिएंट कोरोना वैक्सीन पर भी भारी पड़ सकता है। डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट से ही जुड़ा है, जिसकी सबसे पहले भारत में ही पहचान की गई थी और यही वेरिएंट भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण बना था।

लेकिन ये चिंताएं कितनी वाजिब हैं? वैज्ञानिकों के अनुसार, संक्रमण की और लहरें आ सकती हैं, लेकिन ये कितनी भयावह होगी, ये कई कारकों पर आधारित है।

भारत में कोरोना संक्रमण के नए मामले पहले की तुलना में कम हुए हैं। मई महीने में (दूसरी लहर के पीक के दौरान) भारत में हर रोज़ जहां औसतन चार लाख नए मामले दर्ज किए जा रहे थे, वो अब औसतन 50,000 हो चुके हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि कोरोना के नए मामलों में यह गिरावट राज्यों में लगाए गए सख़्त लॉकडाउन की वजह से आई।

जबकि बाज़ारों की भीड़, चुनावी रैलियों और धार्मिक सम्मेलनों को इसके बढ़ने की वजह बताया गया था। लेकिन सरकार की ख़राब नीतियों, ख़राब सर्विलांस और देर से चेतावनी देने को भी स्थिति बिगड़ने की मुख्य वजहों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्हीं ग़लतियों को अगर दोहराया गया, तो ये तीसरी लहर के जल्दी आने का कारण बन सकती हैं।

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