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काशीपुर की एक तस्वीर ऐसी भी :बारिश के बाद जलभराव की नहीं मनमोहक हरियाली के नजारे, पं अरूण त्रिवेदी पर्यावरण संरक्षण के लिए दे रहे योगदान, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (8 अगस्त 2021)

काशीपुर । आमतौर पर जब भी बारिश होती है तब शहर में जलभराव के वीडियो और तस्वीरों को दिखाकर शासन प्रशासन और नेताओं को कोसा जाता है। लेकिन इसका उल्टा पहलू भी है। काशीपुर में आज भी ऐसी जगह हैं जहाँ आप बारिश को लेकर उसके नकारात्मक पहलू के बारे में सोच ही नहीं सकते।

आज रविवार का दिन है और बारिश भी हुई। शब्द दूत आज आपको शहर काशीपुर की नालियों में बारिश के दौरान बजबजाती गंदगी के बजाय शहर की एक अच्छी तस्वीर दिखाने जा रहा है।

आंखों के अस्पताल के पास पंडित अरूण त्रिवेदी का बाग आपको बतायेगा कि बारिश का मतलब सुंदर प्राकृतिक नजारे भी होता है। आज दोपहर बाद जैसे ही बारिश हुई हरियाली से भरपूर इस बगीचे के मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों को देखकर लगा कि पाठकों को भी इससे अवगत कराना। तस्वीरें और वीडियो देखिये। देखकर सोचिये कि बाग बगीचों को उजाड़ कर कंक्रीट के जंगल हमने बना दिये। प्रकृति ने हमें भरपूर दिया है पर हम प्रकृति से लेने के बजाय उसका दोहन करने में लगे हुए हैं।

पं अरूण त्रिवेदी कहते हैं कि धरती हमारी मां है। यह अब सिर्फ कहने भर को रह गई है। सवाल यह है कि धरती जिसे हम मां कहते हैं तो क्या हम अपनी मां के प्रति बेटे का फर्ज भी निभा रहे हैं? आइये हम इस सवाल का उत्तर ढूंढते हैं। उत्तर ढूढ़ने पर हमें पता चलेगा कि हम क्या कर रहे हैं? तब शायद हमें अपने आप को धरती का बेटा कहने में शर्म आयेगी। पं अरूण त्रिवेदी कहते हैं कि पर्यावरण को संरक्षित करने की शुरुआत हमें खुद से करनी होगी। एक दिन वृक्षारोपण कर और फोटो खिंचवाकर लंबे भाषण देने से पर्यावरण संरक्षण का नाटक बंद होना चाहिए। 

 

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