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जो बाइडेन को मारना चाहता था अल-कायदा, ओसामा बिन लादेन ने नहीं दी थी इजाजत

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (23 अगस्त, 2021)

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के फैसले को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है। बाइडेन के इस फैसले के दूरगामी परिणाम सिर्फ अफगानिस्तान पर नहीं बल्कि पूरे विश्व पर असर डाल सकते हैं। इन सबके बीच 2010 की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि ओसामा बिन लादेन ने एक चिट्ठी के जरिए जो बाइडेन को राष्ट्रपति बनने और उसके परिणामों का जिक्र किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, ओसामा की यह चिट्ठी पाकिस्तान के एबटाबाद की उस जगह से बरामद हुई थी जहां उसे खुफिया ऑपरेशन के तहत मार गिराया गया था। इस चिट्ठी में ओसामा ने अपने संगठन के आतंकियों से कहा था कि वह बाइडेन को निशाने पर न लें। क्योंकि अगर बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो वह अपने आप ही तमाम मुश्किलें खड़ी कर देंगे।

48 पन्ने की यह चिट्ठी साल 2010 में शेख महमूद नाम के शख्स को लिखी गई थी। इसके 36वें पन्ने पर ओसामा ने अपने आतंकी संगठन के सदस्यों को चेतावनी जारी करते हुए कहा था वह किसी भी हाल में बाइडेन को अपने निशाने पर न लें। ओसामा का मानना था कि अगर तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा को कुछ होता है तो उनके उत्तराधिकारी, जो बाइडन अमेरिका के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर देंगे।

ओसामा, जो बाइडेन को एक अयोग्य राष्ट्पति मानता था, इसलिए अपने आतंकियों को बाइडेन के बजाय ओबामा को निशाना बनाने के लिए कहता रहा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 9/11 का बदला लेने के लिए अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया था। तमाम कोशिशों के बाद ओसामा अमेरिका के हाथों से निकलकर 10 सालों तक पाकिस्तान में छिपकर बैठा रहा। इसके बाद एक खुफिया मिशन के तहत अमेरिका के जवानों ने पाकिस्तान के एटाबाद में ओसामा का खात्मा किया था।

ओसामा को मारने के बाद अमेरिकी सैनिक वहां से काफी कुछ अपने साथ लेकर आए थे। जिसमें यह चिट्ठी भी शामिल थी। इस चिट्ठी का खुलासा साल 2012 में पहली बार हुआ था। अब अफगानिस्तान संकट के बाद यह चिट्ठी दोबारा चर्चा में आई है। उस वक्त उस चिट्ठी में लिखी बातें भले ही तर्कहीन मालूम पड़ रही थीं लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वह खासी तार्किक मालूम पड़ रही है।

बता दें कि पिछले दिनों अमेरिका और तालिबान के बीच हुए एक समझौते की जानकारी सामने आई है। जिसमें अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में अपने बचे हुए सैनिकों को वापस बुलाने पर सहमति जताई थी बदले में तालिबान ने वादा किया है कि वह भविष्य में अलकायदा जैसे किसी संगठन को अपने इलाके में काम करने की अनुमति नहीं देगा।

   

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