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टेस्टिंग की तारीख या कोविड-19 की पुष्टि के 30 दिनों के भीतर मौत को ‘कोविड डेथ’ माना जाएगा

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (12 सितंबर, 2021)

टेस्टिंग की तारीख या कोविड-19 मामले में चिकित्सकीय रूप से निर्धारित तारीख से 30 दिनों के भीतर होने वाली मौतों को ही कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों के रूप में माना जाएगा। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में यह बात कही है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) कोविड से संबंधित मौतों के लिए ‘‘आधिकारिक दस्तावेज‘‘ जारी करने के लिए दिशा निर्देश तैयार किए गए हैं। कोविड से हुई मौत पर डेथ सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी, जिसके बाद केंद्र ने मामले में हलफनामा दाखिल किया है।

हलफनामे में कहा गया है कि भले ही रोगी की मृत्यु अस्पताल या फिर इन-पेशेंट सुविधा की जगह हो। हालांकि, अगर कोई कोविड-19 मरीज, अस्पताल या इन-पेशेंट सुविधा में भर्ती होने के बाद 30 दिनों से अधिक समय तक भर्ती रहता है और फिर उसकी मौत हो जाती है तो उसे कोविड -19 की मृत्यु के रूप में माना जाएगा।

साथ ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जहर, आत्महत्या, हत्या और दुर्घटना के कारण होने वाली मौतों के कारण होने वाली मौतों को कोविड​​​​-19 की मौत नहीं माना जाएगा, भले ही कोविड-19 भी इसके साथ हो।

कोविड-19 मामले जो हल नहीं हुए हैं और या तो अस्पताल में या घर पर  मौत हुई और जहां फॉर्म 4 और 4 ए में मेडिकल सर्टिफिकेट ऑफ कॉज ऑफ डेथ (एमसीसीडी) पंजीकरण प्राधिकारी को जारी किया गया है, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (आरबीडी) अधिनियम, 1969 की धारा 10 के तहत आवश्यक, दिशानिर्देशों के अनुसार, एक कोविड​​​​-19 मृत्यु के रूप में माना जाएगा।

   

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