@शब्द दूत ब्यूरो (18 जनवरी 2026)
काशीपुर। काशीपुर के पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में स्थानीय पुलिस कार्रवाई के बीच अब पुलिस विभाग और मृतक के परिजनों के बीच संतुलन बनाये रखने का निर्देश जारी किया गया है। एसआईटी (Special Investigation Team) के प्रमुख और आईजी-एसटीएफ ने मामले की जांच से जुड़े क्राइम सीन का निरीक्षण करते हुए काशीपुर पुलिस को परिवार से दूरी बनाए रखने के आदेश दिए हैं, ताकि जांच निष्पक्ष रूप से चल सके और किसी भी प्रकार का दबाव उत्पन्न न हो। मामले की एफआईआर काठगोदाम थाने में स्थानांतरित की गई है।
बताते चलें कि बीच में कुछ विरोधाभासी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। जिससे यह चर्चा जोरों पर थी कि पुलिस मृतक के परिजनों पर परिजनों पर दबाव बना कर वीडियो बनवा रही थी। शायद यही कारण है कि काशीपुर पुलिस को इस मामले में ये निर्देश दिये गये हैं। वहीं ऊधमसिंहनगर के एस एस पी को लेकर भी चर्चा जोर पकड़ रही थी। ऐसे में एस एस पी के लिए मुश्किलें खड़ होहो सकती हैं।
सुखवंत सिंह ने 10 जनवरी को हल्द्वानी के एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो के माध्यम से लगभग ₹4 करोड़ की जमीन धोखाधड़ी और पुलिस द्वारा उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जो बाद में काफी वायरल हुआ।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई कदम उठाये हैं। आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एक पांच सदस्यीय SIT का गठन किया गया है तथा मामले में 26 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
इसके अलावा पुलिस विभाग द्वारा उधम सिंह नगर से 12 पुलिस कर्मियों को निलंबित/स्थानांतरित किया गया है और ऊपर से जांच को पारदर्शी बनाए रखने के निर्देश दिए गये हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मृतक के परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है और कहा है कि “किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
यह मामला अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल सीबीआई/न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं और राज्य में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
इस बीच एसआईटी चीफ के पुलिस को परिजनों से दूरी बनाए रखने के निर्देश से यह संकेत मिलता है कि जांच पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ेगी, ताकि जल्द से जल्द दोषियों का पता लगाया जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
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