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काशीपुर :जमीन फ्राड ने ली किसान की जान, ऊधमसिंहनगर पुलिस प्रशासन की साख पर लगा दाग?

@विनोद भगत

जमीन फ्राड के दर्दनाक मामले में काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह द्वारा हल्द्वानी के एक होटल में आत्महत्या कर लेना न केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह घटना पूरे उत्तराखंड को झकझोर देने वाली है। यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर हो जाता है क्योंकि मृतक किसान ने अपनी मौत से पहले जो आरोप लगाए, उन्होंने सूबे की पुलिस व्यवस्था की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। माना जाता है कि मौत से पहले आदमी झूठ नहीं बोलता और मौत का यह फैसला चारों तरफ से निराशा और हताशा के बाद ही कोई उठाता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुखद घटना का त्वरित संज्ञान लेते हुए कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को मजिस्ट्रेट जांच सौंप दी है। साथ ही उन्होंने मृतक किसान के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सरकार की यह तत्परता स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा और क्या सिस्टम के भीतर की सच्चाई सामने आ सकेगी।

उत्तराखंड में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े फ्राड के मामले कोई नई बात नहीं हैं। समय-समय पर ऐसे प्रकरण सामने आते रहे हैं, जिनमें आमतौर पर रसूखदार लोगों के नाम उभरते हैं। किसान सुखवंत सिंह भी इसी उम्मीद के साथ पुलिस प्रशासन के पास गया था कि कानून उसे न्याय दिलाएगा। एक आम नागरिक के रूप में यही उसका सबसे स्वाभाविक और संवैधानिक कदम था।

लेकिन आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में सुखवंत सिंह ने जिन हालातों का जिक्र किया, वे बेहद चिंताजनक हैं। उसने एसएसपी से लेकर थाना और चौकी प्रभारियों तक पर गंभीर आरोप लगाए। यदि उसके आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह पूरे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

यह अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमें किसी किसान ने सिस्टम, खासकर पुलिस विभाग पर सीधे तौर पर भ्रष्ट आचरण और रिश्वतखोरी के आरोप लगाते हुए अपनी जान गंवा दी। इससे यह संदेश जाता है कि यदि पीड़ित व्यक्ति को न्याय की उम्मीद ही खत्म हो जाए, तो हालात कितने भयावह हो सकते हैं।

फिलहाल, सभी की निगाहें मजिस्ट्रेट जांच पर टिकी हैं। आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने उत्तराखंड में जमीन फ्राड, पुलिस की भूमिका और आम आदमी के न्याय पर भरोसे जैसे मुद्दों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। अब जरूरत है निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की, ताकि सच्चाई सामने आए और भविष्य में कोई और सुखवंत सिंह सिस्टम की नाकामी का शिकार न बने।

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