@शब्द दूत ब्यूरो (21 दिसंबर 2025)
काशीपुर। बहुचर्चित भूमि कब्जा विवाद को लेकर चल रही बयानबाज़ी के बीच प्रॉपर्टी क्लिनिक के संचालक शक्ति अग्रवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों का सख्त खंडन किया है। बीते रोज गगन कांबोज द्वारा प्रेस कांफ्रेंस कर शक्ति अग्रवाल पर जमीन कब्जाने व जबरन कार्रवाई कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद आज शक्ति अग्रवाल की ओर से एक विस्तृत ऑडियो क्लिप जारी की गई।
ऑडियो में शक्ति अग्रवाल ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप तथाकथित और निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन प्लॉटों (खसरा/प्लॉट संख्या 180 और 181) को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उनका दाखिल-खारिज बिक्री के समय ही विधिवत हो चुका था। उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज कराना विक्रेता नहीं, बल्कि क्रेता की जिम्मेदारी होती है और दोनों ही प्लॉटों पर धारा 143 की कार्यवाही भी संबंधित खरीदारों द्वारा कराई जा चुकी है।
शक्ति अग्रवाल ने “पूरा फ्रंट लिख लेने” के आरोप पर भी सफाई देते हुए कहा कि जमीन का कुल फ्रंट सड़क की ओर 56 मीटर है, जिसमें से 35 फीट सड़क के लिए छोड़ा गया है, जबकि शेष फ्रंट वैध रूप से उनके पक्ष में है। यह सब एग्रीमेंट के समय सभी पक्षों की मौजूदगी में तय हुआ था, जिसके दस्तावेज़ उनके पास उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि उनके पक्ष में माननीय न्यायालय द्वारा 8 दिसंबर 2025 को निषेधाज्ञा आदेश पारित किया गया है, जो वर्तमान में प्रभावी है। ऐसे में मीडिया ट्रायल करना न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में आता है। सड़क से मलबा हटाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह कार्य न्यायालय के आदेश के तहत सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदारों द्वारा किया गया था और इसके फोटो व अन्य साक्ष्य भी उनके पास मौजूद हैं।
फोन कॉल और “सेटिंग” के आरोपों को भी शक्ति अग्रवाल ने झूठा बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल मध्यस्थता के उद्देश्य से संबंधित व्यक्ति का नंबर लिया था, न कि किसी प्रकार की अवैध सेटिंग के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक संगठित सिंडिकेट जानबूझकर भ्रम फैलाकर लोगों को मोहरा बना रहा है।
ऑडियो के अंत में शक्ति अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से ऐसे कथित सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि वे अपने खिलाफ निराधार आरोप लगाने वालों पर मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराएंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे तथ्यों की जांच किए बिना किसी भी भ्रामक कंटेंट पर भरोसा न करें।
इस पूरे प्रकरण में अब दोनों पक्षों के दावों के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है, वहीं सभी की नजरें प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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