@शब्द दूत ब्यूरो (20 अगस्त 2025)
देश के विभिन्न हिस्सों में नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर सार्वजनिक रूप से हमला करने या थप्पड़ मारने की घटनाएँ समय-समय पर सुर्खियों में रही हैं। ऐसी घटनाएँ न केवल नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं बल्कि लोकतंत्र की मर्यादा और स्वस्थ विरोध की संस्कृति पर भी गहरी चोट करती हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमला (अगस्त 2025)
20 अगस्त 2025 को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपनी जनसुनवाई कर रही थीं, तभी गुजरात निवासी एक व्यक्ति अचानक आगे बढ़ा और उन्हें थप्पड़ मार दिया, बाल खींचे तथा धक्का दिया। मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को दबोच लिया। मुख्यमंत्री को हल्की चोट आई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यह घटना राजधानी में सुरक्षा इंतज़ाम पर गम्भीर सवाल छोड़ गई।
अरविंद केजरीवाल पर हमले (2013–2019)
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कई बार सार्वजनिक हमलों के शिकार हुए।
2013 में वाराणसी में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर स्याही फेंकी गई।
2014 में ऑटो रिक्शा से प्रचार के दौरान एक व्यक्ति ने थप्पड़ जड़ा।
2019 में दिल्ली सचिवालय में एक युवक ने मंच पर ही केजरीवाल को थप्पड़ मार दिया।
इन घटनाओं ने उस दौर में भारी राजनीतिक विवाद खड़ा किया था।
शरद पवार पर थप्पड़ (2011, दिल्ली)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बाहर निकलते समय एक युवक ने थप्पड़ मार दिया था। हमलावर ने महंगाई को कारण बताया। घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश उमड़ा और इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताया गया।
योगेंद्र यादव पर हमला (2015, दिल्ली)
स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव पर दिल्ली में जंतर मंतर के पास किसान आंदोलन के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने हमला किया था। धक्का-मुक्की और मारपीट की इस घटना की चारों ओर निंदा हुई।
ओम प्रकाश चौटाला पर हमला (हरियाणा)
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला पर भी एक चुनावी सभा के दौरान लोगों ने जूते फेंके थे।
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी पर हमले
बिहार की राजनीति में भी कई बार ऐसी घटनाएँ देखने को मिलीं। लालू प्रसाद यादव पर रैली के दौरान पत्थर और जूते फेंके गए। राबड़ी देवी के काफिले पर भी हमला हुआ था।
ममता बनर्जी पर हमला (2012, कोलकाता)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कोलकाता में एक रैली के दौरान पत्थर फेंके गए थे। इसके अलावा उनके काफिले पर भी हमले हुए।
नरेंद्र मोदी पर जूता फेंका जाना (2009, अहमदाबाद)
गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 2009 में एक पत्रकार ने जूता फेंका था। हालांकि जूता उन्हें नहीं लगा, लेकिन यह घटना मीडिया की सुर्खियों में रही।
राज ठाकरे पर हमला (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे पर भी एक व्यक्ति ने सार्वजनिक कार्यक्रम में हमला करने की कोशिश की थी, हालांकि पुलिस ने उसे रोक लिया।
अन्य घटनाएँ
– राहुल गांधी की सभाओं में जूते और स्याही फेंकने की घटनाएँ हुईं।
– केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और शरद यादव जैसे कई नेताओं पर भी विरोध जताने के लिए पानी की बोतलें और जूते फेंके गए।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुआ ताज़ा हमला हमें फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि लोकतंत्र में असहमति प्रकट करने का सही तरीका क्या है। नेताओं पर थप्पड़, जूता या हमला करने जैसी घटनाएँ केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और विरोध की स्वस्थ संस्कृति पर भी गहरी चोट करती हैं। विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसक तरीके से इसे करना समाज को गलत दिशा में ले जाने जैसा है।
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