@शब्द दूत ब्यूरो (08 जुलाई 2025)
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम जब भी लिया जाता है, तो उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गुड बुक’ से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा क्यों है? यह जानने के लिए हमें धामी के कार्यकाल, उनकी कार्यशैली, निर्णयों की स्पष्टता और केंद्र सरकार के साथ तालमेल की गहराई से समीक्षा करनी होगी।
2021 में जब पुष्कर सिंह धामी को अचानक उत्तराखंड की कमान सौंपी गई, तब कई लोगों ने इसे एक जोखिम भरा कदम माना। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर विश्वास जताया। वह न सिर्फ धामी के युवा नेतृत्व को समर्थन दे रहे थे, बल्कि भाजपा की स्थिरता और दीर्घकालिक सोच को आगे बढ़ा रहे थे। मोदी ने तीन वर्षों के कार्यकाल के बाद उन्हें पत्र लिखकर उनकी कार्यक्षमता, विकास के प्रति प्रतिबद्धता और राजनीतिक संतुलन की खुलकर सराहना की। यह एक स्पष्ट संकेत था कि धामी ने दिल्ली की नज़रों में खुद को स्थापित कर लिया है।
धामी ने उत्तराखंड को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया जब उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने का निर्णय लिया। इसके अलावा नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण रोकथाम कानून, और राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण जैसे कई फैसले उनके शासन की दृढ़ता और स्पष्टता को दर्शाते हैं। ये सभी निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की ‘न्यायसंगत, पारदर्शी और राष्ट्रहित’ की कार्यशैली से मेल खाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी बार-बार जलवायु संरक्षण और पर्यावरणीय चेतना पर बल देते रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने इस सोच को उत्तराखंड की धरती पर उतारते हुए ‘गंगा उत्सव’ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया और ‘Gross Environment Product’ जैसे नवाचार किए। उन्होंने राज्य के पर्यटन को इस तरह बढ़ाया कि वह राज्य की जनसंख्या से आठ गुना अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर सका, फिर भी पर्यावरण संतुलन बनाए रखा।
धामी ने मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, और स्किल इंडिया को राज्य में प्रभावशाली ढंग से लागू किया। जनधन, आधार और मोबाइल की तिकड़ी के सहारे पारदर्शिता को बढ़ावा दिया गया। केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय के चलते धामी ने कई योजनाओं को समयबद्ध ढंग से कार्यान्वित किया, जिससे प्रधानमंत्री कार्यालय का विश्वास और गहरा हुआ।
राज्य में जब भी किसी संवेदनशील घटना की बात आती है—चाहे वह अंकिता भंडारी हत्याकांड हो या आपदा प्रबंधन—धामी तुरंत सक्रिय नजर आते हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कठोर कार्रवाई की और जनता के बीच अपनी संवेदनशील छवि को मज़बूत किया। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से वे संवाद में रहते हैं, जो मोदी के ‘जनता से सीधा संवाद’ की शैली से मेल खाता है।
पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में भाजपा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने हैं। इससे स्पष्ट है कि न केवल केंद्रीय नेतृत्व बल्कि जनता का भी भरोसा उन पर है। उनका शांत, संयमित लेकिन निर्णायक रवैया जनता में भरोसा पैदा करता है।
पुष्कर सिंह धामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गुड बुक’ में इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने मोदी की सोच को न केवल समझा बल्कि उसे पहाड़ी राज्य में सटीक रूप से लागू भी किया। वह एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो न तो केवल केंद्र के इशारे पर चलते हैं, न ही सिर्फ लोकप्रियता की राजनीति करते हैं, बल्कि विकास, पारदर्शिता, कानून-व्यवस्था और जनविश्वास को सर्वोपरि मानते हैं। यही गुण उन्हें मोदी के सबसे भरोसेमंद मुख्यमंत्रियों की सूची में विशेष स्थान दिलाता है।
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