@शब्द दूत ब्यूरो (03 जुलाई 2025)
नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए अनिल अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) के लोन खाते को “फ्रॉड” घोषित कर दिया है। यह घोषणा बैंकिंग सेक्टर में एक अहम घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है, जिससे अन्य बैंकों और ऋणदाताओं पर भी असर पड़ सकता है।
बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस को दिया गया कर्ज अब फर्जीवाड़े की श्रेणी में डाला गया है। बैंक ने इस खाते की जाँच के लिए पहले ही फॉरेंसिक ऑडिट करवाई थी, जिसमें कई अनियमितताओं के संकेत मिले थे। इन तथ्यों के आधार पर अब इसे “फ्रॉड अकाउंट” करार दिया गया है। रिलायंस कम्युनिकेशंस कई वर्षों से भारी कर्ज में डूबी हुई थी और 2019 में कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के समक्ष दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू की थी। एसबीआई भी उन प्रमुख बैंकों में शामिल है जिन्होंने इस कंपनी को कर्ज दिया था।
आरकॉम साल 2019 से ही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही है। यह कभी भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी थी। लेकिन 2019 तक कंपनी पर अरबों डॉलर का कर्ज हो गया और वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई। अप्रैल में कंपनी ने बताया था कि मार्च 2025 तक उस पर कुल 404 अरब रुपये (4.71 बिलियन डॉलर) का कर्ज है। कंपनी के मैनेजमेंट में दिक्कत, कड़ी प्रतिस्पर्धा और टेलीकॉम सेक्टर में चल रही प्राइस वॉर जैसी वजहों से आरकॉम की हालत खराब हो गई।
फ्रॉड घोषित किए जाने के बाद बैंक अब इस मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास भेज सकता है। इसके साथ ही रिकवरी की प्रक्रिया और तेज हो सकती है। बैंक इस मामले में अन्य कर्जदाताओं के साथ मिलकर आगे की रणनीति तैयार कर रहा है।
एसबीआई के इस कदम के बाद अन्य बैंकों द्वारा भी रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों के खातों की समीक्षा की संभावना है। साथ ही, इस कदम से क्रेडिट मॉनिटरिंग सिस्टम को और सख्त किए जाने की उम्मीद है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस की प्रतिक्रिया अब तक नहीं आई है, लेकिन बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस कदम से अनिल अंबानी समूह की वित्तीय साख पर बड़ा असर पड़ेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बैंकिंग सेक्टर धोखाधड़ी के मामलों को लेकर पहले से ही सतर्कता बरत रहा है।
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