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उत्तराखंड का ‘धामी मॉडल’ : भ्रष्टाचार के खिलाफ भरोसे की एक नई लकीर

@विनोद भगत

उत्तराखंड में हाल के वर्षों में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार के विरुद्ध त्वरित और ठोस कदम उठाए गए हैं, उसने पूरे देश में एक सकारात्मक चर्चा को जन्म दिया है। खासकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जो मॉडल अपनाया गया है, उसे अब ‘धामी मॉडल’ के रूप में जाना जा रहा है। यह मॉडल केवल प्रशासनिक सजगता नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनहित के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का जीवंत प्रमाण बन गया है।

‘धामी मॉडल’ कोई लिखित या घोषित नीति नहीं है, बल्कि एक व्यवहारिक दृष्टिकोण है जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ “शून्य सहिष्णुता” को आधार बनाया गया है। इसका मूल मंत्र है — “संदेह हो तो जांच, दोष मिले तो कार्रवाई और सजा में कोई ढील नहीं।”

इस मॉडल के अंतर्गत कई महत्त्वपूर्ण बिंदु उभर कर आते हैं। जब भी किसी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है, तो सरकार लीक से हटकर बिना देरी जांच के आदेश देती है। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) भर्ती घोटाले में धामी सरकार ने जांच को गंभीरता से लेते हुए STF (विशेष कार्य बल) को जांच सौंपी और कई बड़ी गिरफ्तारियां हुईं।

उच्च स्तरीय दोषियों पर भी शिकंजा कसने से धामी सरकार पीछे नहीं रही। परंपरागत रूप से अधिकतर सरकारें ऊँचे पदों पर बैठे दोषियों को संरक्षण देती हैं, लेकिन धामी मॉडल में यह नहीं देखा गया। चाहे वह आयोग के अधिकारी हों, मंत्री स्तर के लोग हों या प्रभावशाली व्यक्ति — कानून सबके लिए एक समान रहा है।

लगातार हो रही गिरफ्तारियों, निलंबनों और बर्खास्तगी से यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार करने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी स्थिति कुछ भी हो, बच नहीं सकता। यही कारण है कि जनता का विश्वास सरकार में बढ़ा है।

सरकारी भर्तियों में पेपर लीक और भाई-भतीजावाद के मामलों को गंभीरता से लेते हुए भर्ती प्रक्रियाओं को डिजिटली सुरक्षित किया जा रहा है। निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर विशेष बल दिया जा रहा है।

भ्रष्टाचार पर निरंतर सार्वजनिक संवाद के जरिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए स्वच्छ शासन को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री स्वयं समय-समय पर मीडिया और जनसभाओं में यह दोहराते हैं कि “भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” यह निरंतर संवाद जनता को न केवल विश्वास देता है, बल्कि नौकरशाही को भी सख्त संदेश देता है।

कुछ प्रमुख उदाहरण हैं जो ‘धामी मॉडल’ को परिभाषित करते हैं। उनमें UKSSSC पेपर लीक मामला इस मामले में अब तक कई अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वर्ष 2022 से ही मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।नगर निकायों में घोटाले पर भी धामी सरकार गंभीर है। कुछ नगर निगमों में अनियमितता की शिकायत पर सीधी जांच बैठाई गई और कई अभियुक्त निलंबित हुए।

वन विभाग में अवैध खनन और लकड़ी कटान जैसे मामलों में भी दोषियों के खिलाफ बिना देरी के कदम उठाए गए हैं।

पुलिस महकमे में अनुशासन के दृष्टिगत पुलिस भर्ती मामलों में भी जहां शिकायत मिली, वहां जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और कम जनसंख्या वाले राज्य में भ्रष्टाचार लंबे समय से छिपा हुआ जाल बना हुआ था, जिसे जनता झेलती रही थी। लेकिन जब सत्ता की ओर से स्पष्ट रूप से यह संदेश गया कि अब भ्रष्ट आचरण पर कार्रवाई तय है, तो यह जनता के मन में आशा का संचार करने लगा। खासकर युवाओं में सरकारी भर्तियों की निष्पक्षता को लेकर जो निराशा थी, उसमें उल्लेखनीय कमी आई है।

‘धामी मॉडल’ की सफलता को अब राजनीतिक विश्लेषकों और प्रशासनिक विशेषज्ञों द्वारा भविष्य के सुशासन मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है कि किस प्रकार राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रशासनिक सिस्टम को चुस्त-दुरुस्त किया जा सकता है।

उत्तराखंड का ‘धामी मॉडल’ भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक उल्लेखनीय उदाहरण बनकर उभरा है। इसमें केवल नियमों का पालन ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की दृढ़ता, प्रशासन की तत्परता और जनता के साथ पारदर्शी संवाद की भूमिका है। यह मॉडल दर्शाता है कि यदि सरकार सच में चाहे तो न केवल दोषियों को दंडित किया जा सकता है, बल्कि जनता का खोया विश्वास भी पुनः अर्जित किया जा सकता है।

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