व्यंग्य
ज़िला चापलूस नगर के चाटुकार शहर के निवासी भी बड़े विचित्र हैं। इस बार आपको बताते हैं कि चाटुकार शहर के प्यासे लोगों के साथ हुये एक मजाक का किस्सा।
दरअसल चाटुकार शहर में पानी की बड़ी किल्लत रहती थी। शहर के लोगों ने जिसे अपना मुखिया चुना था उनके पास जाकर किसी ने अपनी समस्या बताई। समस्या का निदान जल्दी ही किया जायेगा। चाटुकार शहर में कोई प्यासा नहीं रहेगा। इस घोषणा का चाटुकार शहर के लोगों ने स्वागत कर डाला। यही नहीं मुखिया ने साफ़ तौर पर कहा कि हर किसी को भरपूर पानी मिलेगा। और इसके लिए एक विशाल पानी की टंकी का निर्माण शुरू करवा दिया गया। चाटुकार शहर के लोग निश्चिंत हो गये कि अब उनकी प्यास जरूर बुझ जायेगी।
पानी की टंकी बनती देख लोगों ने मुखिया को वाहवाही और शाबाशी देनी शुरू कर दी। यहां तक कि मुखिया पानी की टंकी के निर्माण के दौरान फिर चुन लिया गया। हालांकि इस बीच पानी की टंकी निर्माणाधीन ही रही। उधर चाटुकार शहर में मुनादी करने वालों की संख्या भी काफी बढ़ गई। हर दूसरे दिन मुनादी करने वाले पानी की टंकी को लेकर चाटुकार शहर के लोगों के बीच मुनादी करते रहे। मुनादी सुनकर चाटुकार शहर के लोग खुश हो जाते और भारी प्यास से सूखते गलों के बावजूद वाह वाह करते। हालांकि कुछ मुनादी करने वाले इससे बचते नजर आये। कारण यह की पानी की टंकी का निर्माण पूरा होने की मुनादी के अगले दिन फिर इसमें कोई पेंच फंस जाता और मुनादी करने वालों को पहले दिन की गई अपनी मुनादी को कैंसिल कर फिर यह मुनादी करनी पड़ती कि पानी की टंकी का निर्माण फिर रोक दिया गया है।
चाटुकार शहर के प्यासे लोग कई वर्षों तक अपने सूखे गले तर करने की आस में शहर के मुखिया और मुखिया के विरोधियों के दावे प्रतिदावे के बीच झूलते रहे। आखिरकार वर्षों की प्रतीक्षा के बाद पानी की टंकी के निर्माण की सुखद सूचना चाटुकार शहर के प्यासे लोगों को मिली। हालांकि अभी तक के घटनाक्रम को देखते हुए चाटुकार शहर के लोग आशंकित जरूर थे। और जब पानी की टंकी का निर्माण पूरा हुआ तो चाटुकार शहर के लोगों की आशंका सच साबित हुई।
दरअसल दावा किया गया था कि चाटुकार शहर के हर व्यक्ति को भरपूर मात्रा में पानी मिलेगा। लेकिन पानी की टंकी को लेकर कुछ प्रतिबंध लगा दिए गये थे। एक बार में इस पानी की टंकी से केवल एक गिलास ही पानी निकल सकता था। बड़ी बाल्टी या बड़े मटके से इस पानी की टंकी से पानी निकालने पर खतरा था। शहर के प्यासे लोग हैरान और परेशान थे। क्या एक गिलास पानी के लिए वर्षों की प्रतीक्षा की थी उन्होंने? बहरहाल चाटुकार शहर की समस्या आज भी अपनी जगह कायम थी। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी शहर के लोगों के गले प्यास से सूखे ही रह गए।
डिस्क्लेमर – शहर और घटना दोनों काल्पनिक है। किसी व्यक्ति विशेष या शहर से मिलना संयोग हो सकता है। इसे केवल व्यंग के तौर पर पढ़ें।(विनोद भगत – संपादक)
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