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काशीपुर: मेयर पद पर पर्वतीय समाज के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने पर हो रहा मंथन, सुगबुगाहट शुरू,कई नामों पर चल रहा विचार

@शब्द दूत ब्यूरो (18 अप्रैल 2023)

काशीपुर। मेयर के लिए अभी राजनीतिक दलों ने अपने पत्ते भले ही अभी नहीं खोले हैं। दरअसल मेयर पद पर आरक्षण की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं होना इसका एक कारण है। इसीलिए राजनीतिक दलों के दावेदार खुलकर अभी सामने नहीं आ रहे हैं हालांकि भीतर ही भीतर तैयारियां जरूर शुरू कर दी गई है।

इधर शहर के लगभग तीस हजार मतदाता होने के दावों के साथ पर्वतीय समाज में इस बार मेयर पद को लेकर सुगबुगाहट शुरू होती नजर आ रही है। बता दें कि पर्वतीय समाज के ये मतदाता अलग अलग राजनीतिक दलों के सदस्य भी हैं। ऐसे में पर्वतीय समाज की ओर से जिन दावेदारों के नाम सामने लाये जा रहे हैं उनके खुद के सामने अपनी पार्टी की निष्ठा और पर्वतीय समाज की ओर से खुलकर दावेदारी करना बड़ा मुश्किल फैसला साबित हो सकता है। पर्वतीय समाज के लोग उनके नाम सामने ला रहे हैं लेकिन वही दावेदार अपनी पार्टी भाजपा कांग्रेस हाईकमान के निर्णय से बंधे हुए हैं।

पर्वतीय समाज के लोगों का कहना है कि उनकी इतनी संख्या है जिससे वह मेयर बनाने की क्षमता रखते हैं। पर दूसरी ओर अब तक का चुनावी इतिहास देखें तो पर्वतीय समाज के बंटे हुए मतदाताओं के चलते यह काफी मुश्किल लगता है। एक तो राष्ट्रीय दलों द्वारा शहर के किसी पर्वतीय समाज के व्यक्ति को मेयर का प्रत्याशी घोषित करना शायद ही मुमकिन हो। और अगर घोषित कर भी दिया तो पर्वतीय समाज का एक मुश्त वोट मिल पाना नामुमकिन है। वजह वही अपने अपने दल के प्रति निष्ठा पर्वतीय समाज के प्रति निष्ठा पर भारी पड़ सकती है।

शहर में देवभूमि पर्वतीय महासभा नामक पर्वतीयों का एकमात्र संगठन है। उस संगठन के लोग पिछले काफी लंबे समय से आपस में उलझे हुए हैं। ऐसे में नहीं लगता कि पर्वतीय समाज के किसी व्यक्ति को स्थानीय पर्वतीय मतदाता एकजुट होकर लड़ायेंगे। पर्वतीय समाज के लोगों का तो यहां तक कहना है कि राष्ट्रीय दलों से टिकट नहीं मिलता तो निर्दलीय  रूप से अपना प्रत्याशी खड़ा किया जाना चाहिए।

यहां यह कहना जरूरी है कि शहर में पर्वतीय समाज के ऐसे ऐसे नामचीन चेहरे हैं जो योग्यता और विद्वत्ता के साथ कुशल राजनेता भी हैं लेकिन राष्ट्रीय दलों के आगे उनकी कुशलता और विद्वत्ता मायने नहीं रखती। बहरहाल पर्वतीय समाज के लोगों में इन दिनों इस बात को लेकर काफी मंथन चल रहा है।पर इस मंथन का नतीजा क्या निकलकर आयेगा अभी ये कहना जल्दबाजी होगी।

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