@शब्द दूत ब्यूरो (02 नवंबर 2022)
देहरादून । उत्तराखण्ड में 180 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग के मामले को लेकर भूचाल आ गया है। काले धन को वैध करने के लिए सोशल म्यूचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड की जांच में कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। विधायक उमेश कुमार ने इस मामले को सबसे पहले उठाया था। अब इस मामले से राज्य में हलचल मची हुई है। मनी लॉन्ड्रिंग के इन आरोपों की सच्चाई का पता लगाने को अभी जांच जारी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार की पत्नी भी इस कंपनी में डायरेक्टर के पद पर थीं। ऐसे में यह मामला काफी हाई प्रोफाइल बन गया है। कंपनी में फर्जी रूप से आर डी और एफ डी खोलीं गई थीं। कई लोगों के आधार कार्ड भी खाते खोलने के लिए डाउनलोड कर लिये गये ऐसा आरोप लग रहा है। हालांकि मामले की सच्चाई जांच के बाद ही पता चल पायेगी।
कंपनी में हजारों खाते खोले गए हैं जिनकी आर्थिक अपराध शाखा बारीकी से जांच कर रही है। खानपुर विधायक उमेश कुमार का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर इसकी जांच कराई है। मामले के आरोपियों ने फर्जी तरीके से वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज लिए और खाते खोल दिये। लिए और इनके माध्यम से खाते खोले। कई ऐसे लोगों के खाते खुले बताये जाते हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। विधायक उमेश कुमार की ओर से ऐसे खातों की जानकारी पहले ही सरकार को दे दी गई है।
जब यह मामला काफी सुर्खियों में आ गया तो राज्य सरकार के निर्देश पर इसकी जांच सीबीसीआईडी के अधीन आर्थिक अपराध शाखा को दे दी गई है। पिछले महीने छह अक्टूबर इस आशय के आदेश भी जारी हो गया था। जांच के लिए कंपनी के निदेशकों को भी आर्थिक अपराध शाखा द्वारा तलब किया जा सकता है। इतना ही नहीं जो खाते खुले हैं उनके पतों की भी जांच की जा सकती है।
उधर पुलिस अधिकारी कहते हैं कि अभी जांच चल रही है यदि गड़बड़ी साबित हुई तो आरोपी पाये गये लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जायेगी।
बहरहाल उत्तराखंड में इस मामले में काफी हलचल मची हुई है।
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