@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (13 जून, 2022)
श्रीलंका के एक बड़े पावर प्रोजेक्ट को सीधे गौतम अडानी ग्रुप को देने के लिए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर पीएम मोदी द्वारा दबाव दिए जाने के दावे को श्रीलंकाई अधिकारी ने वापस ले लिया है। साथ ही राष्ट्रपति राजपक्षे ने इसका जोरदार खंडन किया है। वहीं, श्रीलंका के बिजली प्राधिकरण के प्रमुख द्वारा वापस लिए गए आरोप पर सरकार ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
आरोपों में श्रीलंका के मन्नार जिले में 500 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजना शामिल है। श्रीलंका के सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने एक संसदीय पैनल को बताया था कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने उन्हें बताया है कि पीएम मोदी ने उन पर पवन ऊर्जा परियोजना को सीधे अडानी समूह को देने के लिए दबाव डाला था।
ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में फर्डिनेंडो को सार्वजनिक उद्यम समिति (सीओपीई) की खुली सुनवाई में दावा करते हुए दिखाया गया है। समाचार पत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, फर्डिनेंडो ने पैनल को बताया कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने “मुझे बताया कि वह मोदी के दबाव में थे।” एक दिन बाद, राष्ट्रपति राजपक्षे ने ट्विटर पर इसका खंडन किया।
राष्ट्रपति राजपक्षे ने ट्वीट किया था “मन्नार में एक पवन ऊर्जा परियोजना के संबंध में एक समिति की सुनवाई में सीईबी अध्यक्ष द्वारा दिए गए एक बयान का मैं खंडन करता हूं। मैं स्पष्ट रूप से किसी विशिष्ट व्यक्ति या संस्था को इस परियोजना को प्रदान करने के लिए प्राधिकरण से इनकार करता हूं।”
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