@आचार्य धीरज याज्ञिक (29 मई 2022)

शास्त्रानुसार वर्ष के प्रत्येक महीने में अमावस्या पड़ती है परन्तु जो अमावस्यास सोमवार को पड़ती है वह “सोमवती अमावस्या” कहलाती है।इस दिन स्नान,दान के लिए शुभ समझा जाता है। चूंकि सोमवार शिव जी का दिन होता है इसलिए सोमवती अमावस्या भी उन्हीं को समर्पित होती है। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है,यदि तीर्थ में जाना संभव न हो पाए तो प्रातः ही किसी नदी या तालाब में स्नान करके भगवान शिव,माता पार्वती,श्री विष्णु जी और तुलसी की पूजा करें। इसके बाद पीपल वृक्ष की पूजा करके के वृक्ष की 108 परिक्रमाएं करें। ध्यान रहे कि हर परिक्रमा में कोई वस्तुे चढ़ानी है। इसके अलावा प्रदक्षिणा के समय 108 फल अलग रखें और वे सभी वस्तुपएं गरीबों व ब्राह्मणों को दान करें।
सोमवती अमावस्याा को पितृ दोष दूर करने के लिए उपाय
अमावस्या तिथि पितरों की तिथि है परन्तु सोमवार पड़ जाने से इसका और महत्व बढ़ जाता है। मान्यताओं के अनुसार –
एक ब्राह्मण को भोजन करा कर दक्षिणा प्रदान करना प्रभावी उपाय है।
खीर बनाकर दक्षिण दिशा में कंडे की आग पर अर्पित करने से लाभ होता है।
पीपल वृक्ष पर जनेऊ अर्पण करना और एक जनेऊ भगवान विष्णु जी को अर्पित करने से लाभ होता है।
पीपल और भगवान विष्णुजी की पूजा करके प्रार्थना करते हुए 108 बार पीपल की परिक्रमा करें और एक मिठाई पीपल को अर्पित करें लाभ होगा।
परिक्रमा करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इस मंत्र का जप करते रहें।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
प्रयागराज।
संपर्क सूत्र-09956629515
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