@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (27 मई, 2022)
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में आरोप लगाया है कि पीएमओ में कार्यरत हिरेन जोशी के इशारे पर आईटी सेल के लोग सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाते हैं और बुरा-भला कहते हैं। स्वामी ने इस बहाने पीएम मोदी को भी घेरा और लिखा कि ‘मोदी और मेरे बीच यह अंतर है कि उन्होंने हिरेन जोशी जैसे अंधभक्तों को मेरे परिवार के खिलाफ अपशब्द कहने के लिए रखा है। मैं अपने ट्वीट खुद लिखता हूं और मोदी के ट्ववीट हिरेन जोशी जैसे लोग पैसे लेकर लिखते हैं।’
हिरेन जोशी पीएमओ में ओएसडी हैं। उन्हें नरेंद्र मोदी की आंख और कान भी कहा जाता है। हिरेन जोशी की प्रारंभिक शिक्षा बांसवाड़ा, राजस्थान से हुई है। इसके बाद पुणे से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की। फिर उन्होंने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान ग्वालियर से पीएचडी की डिग्री हासिल की। जोशी ने अपने करियर की शुरुआत भीलवाड़ा के माणिक्य लाल वर्मा टेक्सटाइल एंड इंजीनियरिंग कॉलेज से बतौर सहायक प्रोफेसर की थी।
नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब राज्य सरकार ने वहां के इंजीनियर्स के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम के दौरान अचानक तकनीकी दिक्कत आ गई, चूंकि इस कार्यक्रम में सीएम भी मौजूद थे तो सबके हाथ-पांव फूलने लगे।
हालांकि हिरेन जोशी ने कुछ ही मिनटों में खामी दूर कर दी, इससे मोदी उनसे काफी प्रभावित हुए। बाद में साल 2008 में जोशी को नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट को हैंडल करने की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद वह नरेंद्र मोदी और करीब आते गए और उन्हें सीएम मोदी का ओएसडी बना दिया गया।
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो हिरेन जोशी की एंट्री भी पीएमओ में हुई और वो ओएसडी बने। पीएमओ में उनकी रैंक जॉइंट सेक्रेट्री स्तर की है। सियासी गलियारों में जोशी को पीएम की आंख-कान भी कहा जाता है। हिरेन जोशी, प्रधानमंत्री मोदी की वेबसाइट, ब्लॉग, सोशल मीडिया अकाउंट (ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि) की सभी गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार जापान यात्रा पर जा रहे थे। इस यात्रा से ठीक पहले उनके ट्विटर अकाउंट से जापानी में एक ट्वीट किया गया। पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट से जापानी में ट्वीट देखकर लोगों को लगा कि उनका अकाउंट हैक हो गया है लेकिन ऐसा नहीं था।
इस ट्वीट के पीछे भी हिरेन जोशी ही थे, जिन्होंने ट्वीट को जापान में मौजूद भारतीय दूतावास से ट्रांसलेट करवाकर, फिर सॉफ्टवेयर पर जांच करने के बाद नरेंद्र मोदी के अकाउंट से पोस्ट किया था।
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