@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (15 मई, 2022)
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक से लोन लेने वाले एक किसान के ओटीएस (एकमुश्त निपटान) प्रस्ताव को स्वीकार करने के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र की खिंचाई की। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बैंक को किसान का ओटीएस प्रस्ताव स्वीकार करने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 21 फरवरी, 2022 के आदेश का विरोध करने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा , “बड़ी मछली के पीछे जाएं। सुप्रीम कोर्ट में इस तरह का मुकदमा किसानों के परिवारों को आर्थिक रूप से खराब कर देगा।”
पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करते जो हजारों करोड़ लूटते हैं, लेकिन किसानों का मामला आने पर पूरा कानून बन जाता है। आपने डाउन पेमेंट भी स्वीकार कर लिया।”
वर्तमान मामले में प्रतिवादी ने लोन लिया था और इसे एकमुश्त निपटान के रूप में भुगतान करने का इरादा रखता था, जिसकी राशि 36,50, 000 रुपए थी। इसके अलावा प्रतिवादी ने बैंक में 35,00, 000 रुपये जमा भी कर दिए थे।
हालांकि बैंक की रिकवरी ब्रांच ने किसान को बताया कि उन्हें बकाया राशि के पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में 50.50 लाख रुपये जमा करने होंगे।
इससे क्षुब्ध होकर प्रतिवादी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि 9 मार्च, 2021 के पत्र से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को निर्धारित समय के भीतर ओटीएस राशि का न्यूनतम 10% भुगतान करना आवश्यक था और उसने समय में 36,50, 000 रुपए में से 35,00, 000/- रुपये जमा कर दिए थे।
उन्होंने आगे कहा कि बैंक के पास एकमात्र विकल्प ‘सूचना पत्र’ जारी करने के चरण के बाद आगे बढ़ना था और यदि याचिकाकर्ता पात्र था तो ‘मंजूरी पत्र’ जारी करें। यह भी वकील का तर्क था कि बैंक इसे स्वीकार करने में बुरी तरह विफल रहा और इसके विपरीत, समझौता राशि को एकतरफा रूप से 50.50 लाख रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया जो ओटीएस योजना के विपरीत था।
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