@शब्द दूत ब्यूरो (17 जनवरी, 2022)
एक बार फिर ‘शब्ददूत’ की खबर पर मुहर लगी है। हमने हरक सिंह रावत के कांग्रेस में जाने की खबर का खुलासा किया था, जो सही साबित हुई। हरक सिंह रावत काफी लंबे अरसे से भाजपा में असहज महसूस कर रहे थे। वे लगातार अपनी नाराजगी का इजहार भी कर रहे थे। दरअसल, हरक खुद के लिए मनमाफिक सीट और अपनी पुत्रवधु के लिए लैंसडाउन विधानसभा की मांग कर रहे थे। उनकी इसी मांग से खिन्न होकर भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
दरअसल, देहरादून में भाजपा चुनाव संचालन समिति की बैठक में 46 उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बन गई थी और यह करीब-करीब तय हो गया था कि हरक सिंह रावत को केदारनाथ से पार्टी उम्मीदवार बनाएगी। टिकट वितरण को लेकर नाराज चल रहे हरक सिंह इस मीटिंग में भी शामिल नहीं हुए थे और रविवार शाम को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंच गए। सूत्रों का कहना है कि उन्हें इन दोनों नेताओं से भी कोई आश्वासन नहीं मिला और इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं से मुलाकात की थी, जिससे पार्टी आलाकमान नाराज था।
इसके बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में जेपी नड्डा के निर्देश पर उन्हें भाजपा से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हरक सिंह कोटद्वार की सीट बदलने और परिवार के तीन लोगों के लिए टिकट मांग कर वह भाजपा पर लगातार दबाव बना रहे थे और दूसरी तरफ कांग्रेस में अपनी वापसी की राह तलाशने में भी जुटे थे।
इसके अलावा हरक सिंह अपने बयानों से लगातार भाजपा के लिए मुसीबत बढ़ाने का काम कर रहे थे। वह पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक रूप से पार्टी को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक उन्हें कई बार समझाने और मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके तेवर नरम नहीं पड़े।
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