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रोचक :एक ऐसी पेंटिंग जिसके लिए बन रहा ढाई अरब का घर

इस पेंटिंग का नाम है, ‘एडोरेशन ऑफ द मिस्टिक लैंब।’ लेकिन गेंट ऑल्टरपीस के नाम से लोग ज्यादा पहचानते हैं इसे। यह बनी थी 1432 में बेल्जियम के गेंट शहर में। बारह पैनलों वाली इस पेंटिंग का नाम है गेंट ऑल्टरपीस, इसे नष्ट करने के लिए भीड़ ने चर्च पर धावा बोल दिया था।

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (10 दिसंबर, 2021)

दुनिया भर में मशहूर 12 पैनल वाली पेंटिंग। बेहतरीन कला का शानदार नमूना। इतनी खूबसूरत और बेशकीमती कि इसे अपना बनाना चाहते थे नेपोलियन और हिटलर जैसे ताकतवर लोग। इस कलाकृति के लिए सबसे ज्यादा बेताब थे नाजी। ताकतवर लोगों की नजर में चढ़ने के चलते एक और खास चीज जुड़ गई इसके साथ। यह आर्ट हिस्ट्री में सबसे ज्यादा चोरी होने वाली पेंटिंग बन गई। इसे नष्ट करने तक की कोशिश हुई। लेकिन यह अब भी काफी हद तक सलामत है।

इस पेंटिंग का नाम है, ‘एडोरेशन ऑफ द मिस्टिक लैंब।’ लेकिन गेंट ऑल्टरपीस नाम से लोग ज्यादा पहचानते हैं इसे। यह बनी थी 1432 में बेल्जियम के गेंट शहर में। बनाने वाले दो भाई थे- ह्यूबर्ट और जान वैन आइक। गेंट ऑल्टरपीस को यूरोपियन आर्ट और पेंटिंग जगत की अनमोल धरोहर माना जाता है। यह दुनिया की पहली चर्चित ऑयल पेंटिंग थी। इसमें छिपा है ईसाई धर्म का सार।

गेंट ऑल्टरपीस बनने के बाद से ही लगातार झंझावतों से जूझती रही। शुरुआत हुई 16वीं सदी के मध्य से। उस वक्त गेंट में कैथलिक के बजाय केल्विनवाद को आधिकारिक धर्म का दर्जा मिल गया। केल्विनवादी मूर्तिपूजा के विरोधी थे। उनकी नजर में गेंट ऑल्टरपीस थी मूर्तिपूजा की सबसे बड़ी निशानी। लिहाजा, वे इसके पीछे पड़ गए। एक बार तो भीड़ उस चर्च में घुस गई, जहां यह कलाकृति रखी थी। लेकिन पेंटिंग वहां नहीं मिली। कैथलिक संप्रदाय के लोग पहले ही उसे सुरक्षित जगह पहुंचा चुके थे।

फिर 1781 में रोमन साम्राज्य के सम्राट जोसेफ द्वितीय गेंट आए। उन्हें गेंट ऑल्टरपीस की खूबसूरती काफी पसंद आई, लेकिन एडम और ईव की नग्न पेंटिंग देखकर झटका लगा। उनका मानना था कि यह नग्नता फिजूल है, अश्लीलता है। सम्राट की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते थे गेंट के मेयर। लिहाजा, एडम और ईव वाला पैनल हटा दिया गया।

गेंट ऑल्टरपीस को कुल सात दफा चुराने की कोशिश हुई। सबसे पहले चुराया नेपोलियन बोनापार्ट ने। इसे वह ले गया फ्रांस, लूवर म्यूजियम की शान बढ़ाने के लिए। यह पेंटिंग 1815 में दोबारा गेंट लौटी, जब वॉटरलू के युद्ध में नेपोलियन हार गया। कुछ पैनलों को प्रशा के राजा ने खरीद लिया, 16 हजार पाउंड की भारी भरकम रकम खर्च करके। प्रशा के राजा ने पैनलों को सुपुर्द किया बर्लिन के कैसर फ्रेडरिक संग्रहालय को।

फिर प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पेंटिंग के कई पैनल जर्मनी के हाथ लग गए। विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के बाद वार्साय की संधि हुई। यह वही संधि थी, जिसे जर्मनी का अपमान बताकर एडोल्फ हिटलर ने अपनी राजनीति चमकाई और आखिरकार यह द्वितीय विश्व युद्ध की वजह बनी। वार्साय की संधि में कई चीजें लौटाने पर सहमति बनी। इनमें गेंट ऑल्टरपीस भी शामिल थी, जो एक बार फिर बेल्जियम को वापस मिल गई।

लेकिन दुर्भाग्य और चोरों ने इस बेशकीमती पेंटिंग का पीछा नहीं छोड़ा। 1934 में गेंट ऑल्टरपीस के दो पैनल- ‘द जस्ट जजेज’ और ‘सेंट जॉन द बैपटिस्ट’ चोरी हो गए। चोरी के बाद गेंट के बिशप को ब्लैकमेलिंग वाले कई खत मिले। पैनलों के बदले 10 लाख बेल्जियम फ्रैंक की फिरौती मांगी गई। चोरों ने अपनी निशानदेही पर ‘सेंट जॉन द बैपटिस्ट’ पैनल बरामद भी करा दिया, ताकि प्रशासन को भरोसा हो जाए कि पैनल सचमुच उनके कब्जे में हैं। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफल नहीं रही और ‘द जस्ट जजेज’ पैनल आज तक नहीं मिला। यह बेल्जियम ही नहीं, बल्कि कला जगत की सबसे रहस्यमय चोरी बनकर रह गई।

यह पेंटिंग आखिर में फिर वापस पहुंच गई बेल्जियम। लेकिन इस पूरी उथल-पुथल में पेंटिंग को काफी नुकसान पहुंचा। ऑल्टरपीस वापस तो आ गई, लेकिन द जस्ट जजेज पैनल के बिना अधूरी थी। इसे पूरा करने का जिम्मा उठाया, बेल्जियम के जेफ वान डेर वेकेन ने। उन्होंने द जस्ट जजेज पैनल की एक प्रति तैयार की।

बेल्जियम ने इतिहास से सबक लिया। पिछले कई वर्षों से गेंट ऑल्टरपीस को सुरक्षित रखने की बड़ी योजना पर काम चल रहा था। इसके लिए 3 करोड़ यूरो यानी तकरीबन ढाई अरब रुपये की लागत से शीशे का घर बना। गेंट में सर्दियों के दौरान पारा 2 डिग्री तक गिर जाता है, तो गर्मियों में काफी तेज धूप भी आती है।

पेंटिंग का नया ठिकाना दोनों मौसमों से उसकी हिफाजत करेगा। साथ ही, कला के कद्रदान कला जगत की इस सदियों पुरानी अनमोल धरोहर को निहार भी सकेंगे। इसे छह मीटर ऊंचे बुलेट प्रूफ डिसप्ले में रखा जाएगा, ताकि सबसे ज्यादा चोरी होने वाली पेंटिंग, एक दफा और न चोरी हो जाए।

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