@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (27 अक्टूबर, 2021)
पहली बार वैज्ञानिकों को ‘अमर’ केकड़ा मिला है। यह क्रेटाशियस काल का है। यानी इसकी उम्र करीब 10.5 करोड़ साल से लेकर 9.50 करोड़ साल के आसपास है। वैज्ञानिक इसे साफ पानी और समुद्री जीवों के बीच की कड़ी मान रहे हैं। वैज्ञानिक इसे अमर इसलिए नहीं कह रहे हैं क्योंकि ये जीवित है, बल्कि इसका शरीर करोड़ों साल पहले एक अंबर में कैद हो गया था। जिसकी वजह से केकड़े का शरीर अभी तक सही सलामत है। यानी वैज्ञानिक इसका विस्तार से अध्ययन कर सकते हैं।
इस ‘अमर’ केकड़े को क्रेटस्पारा अथानाटा नाम दिया गया है। अथानाटा यानी अमर, क्रेट मतलब खोल वाला और अस्पारा मतलब दक्षिण-पूर्व एशिया में बादलों और पानी के देवता का नाम। यह नाम इसके उभयचरी जीवन और जगह के नाम पर दिया गया है। यह स्टडी हाल ही में साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित हुई है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर जेवियर लूक ने कहा कि यह ‘अमर’ केकड़ा इसलिए भी दुर्लभ है क्योंकि वैज्ञानिकों को आमतौर पर कीड़े, मकोड़े, बिच्छू, मिलीपीड्स, पक्षी, सांप अंबर में जकड़े मिलते हैं. लेकिन ये सभी जमीन पर रहने वाले जीव हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई पानी में रहने वाला जीव अंबर में जकड़ा हुआ मिला है। आमतौर पर केकड़े पानी में ही रहते हैं. वो जंगलों में नहीं आते, न ही पेड़ों पर चढ़ते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि असली और नकली केकड़े धरती पर पांच बार विकसित हुए। वैज्ञानिकों ने केकड़ों के विकास के बारे में जर्नल बायोएसेस में लिखा था। इंग्लिश जीव विज्ञानी लांसलॉट एलेक्जेंडर बोरडेल ने इस जर्नल में लिखा था कि केकड़ों के विकास को कार्सिनिजेशन कहते हैं। सबसे पुराना केकड़ा 20 करोड़ साल पहले जुरासिक काल में दर्ज किया गया था। इस काल में क्रेटाशियस क्रैब रिवोल्यूशन चल रहा था। यानी केकड़ों की प्रजातियों में तेजी से बदलाव आ रहा था।
अनोमूरा समूह के केकड़े आमतौर पर चलने के लिए अपने तीन पैरों का ही उपयोग करते हैं। जबकि, असली केकड़े यानी ब्राचयूरा समूह के केकड़े चारों पैरों पर चलते हैं। इसका मतलब ये है कि 10.5 करोड़ साल पुराना ये ‘अमर’ केकड़ा ब्राचयूरा समूह के वर्तमान केकड़ों का असली पूर्वज है।
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