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महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में बताई अपनी अंतिम इच्छा, लिखा- बदनामी से अच्छा है मर जाना

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (22 सितंबर, 2021)

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। इन सबके बीच पांच डॉक्टरों की टीम उनका पोस्टमार्टम करेगी और पोस्टमार्टम के बाद उन्हें भू समाधि दे दी जाएगी।

वसीयत के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद बलबीर गिरि उनके उत्तराधिकारी होंगे। बलबीर गिरि उनके 15 साल पुराने शिष्य हैं और अब तक वो हरिद्वार आश्रम के प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे। महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत में बलबीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है।  

सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरि ने अपनी अंतिम इच्छा भी लिखी है। उन्होंने शिष्य बलबीर गिरि को जिम्मेदारी सौंपी है कि पार्क में नींबू के पेड़ के पास उनकी समाधि लगा दी जाए। उन्होंने पत्र में लिखा, “मेरा मन आनंद गिरी के चलते बहुत विचलित हो गया है। आनंद गिरि मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। आज जब मुझे सूचना मिली है कि हरिद्वार से कंप्यूटर के जरिए वह लड़की या महिला की तस्वीर लगाकर मेरा फोटो वायरल कर देगा। मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं, अगर मेरी बदनामी हुई तो मैं कैसे जी पाऊंगा। इससे अच्छा तो मर जाना है।”

उन्होंने खत में ये भी लिखा था कि मैंने पहले भी आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया। एक ऑडियो कैसेट भी आनंद गिरि ने जारी किया था जिससे मेरी बदनामी हुई थी। आज मैं हिम्मत हार गया हूं। उन्होंने इस लेटर में ये भी साफ किया कि मैं पूरे होश हवास में बगैर किसी दबाव के खत लिख रहा हूं। आनंद गिरी ने मुझ पर झूठे और मनगढंत आरोप लगाए हैं. मैं मरने जा रहा हं, सत्य कह रहा हूं कि मैंने एक भी पैसा घर पर नहीं दिया। एक-एक पैसा मठ में लगाया है। 

उन्होंने खत में ये भी लिखा कि आनंद गिरि ने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं, उससे मेरी और मठ की काफी बदनामी हुई है। मैं बेहद आहत हूं इसलिए मरने जा रहा हूं।

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