@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (12 जुलाई, 2021)
उत्तर भारत में रविवार को भारी बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने से करीब 50 लोगों की मौत हो गई है। वज्रपात के वक्त अक्सर लापरवाही जानलेवा साबित होती है। थोड़ी सी सावधानी हमें मौत के मुंह में जाने से बचा सकती है। आकाशीय बिजली के खतरे को भांपने का 30-30 का फार्मूला भी है। ऐसे प्राकृतिक हादसों पर नजर रखने वाली साइट ऑल्टेकग्लोबल ने ऐसी ही तमाम सावधानियों के बारे में बताया है। आप भी जानिए कि बिजली गिरते वक्त क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
आकाशीय बिजली गिरते वक्त घर के बाहर हैं तो 30-30 का नियम खतरे का अनुमान लगाने का आसान तरीका है। जब आपके इलाके में बिजली चमके तो तुरंत सेकेंड के हिसाब से 30 तक गिनती शुरू कर दें। अगर 30 सेकेंड के भीतर ही बिजली की गड़गड़ाहट भी सुनाई दे जाती है तो समझ लीजिए यह खतरा है और किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेना बेहतर है।
बिजली गिरते वक्त बाहर हैं तो किसी इमारत में शरण लें। अगर वहां बिल्डिंग नहीं हैं तो गुफा, कार, किसी वाहन या कठोर परत वाली जगह के नीचे चले जाएं। पेड़ सुरक्षा का बेहतर विकल्प नहीं हैं, क्योंकि वे बिजली को अपनी ओर खींच सकते हैं।अगर आप कहीं शरण नहीं ले सकते तो कम से कम इलाके की सबसे ऊंचे वस्तु जैसे टावर से दूर रहें। आसपास इक्का-दुक्का ही पेड़ हैं तो खुले मैदान में ही कहीं झुककर बैठ जाना ही सबसे बेहतर है।
रेडियो, टोस्टर जैसे किसी बिजली चालित सामान से दूर हो जाएं। बिजली चमकने के अंदेशे के पहले ही इलेक्ट्रानिक उपकरणों को प्लग से हटा दें। आग की जगहों, रेडियटर्स, स्टोव, किसी भी धातु के उपकरणों, सिंक और फोन का भी इस्तेमाल न करें.
खिड़कियों, दरवाजे और बरामदा में भी न जाएं। घर में किसी धातु के पाइप को भी न छुएं। हाथ धोने या शॉवर का उपयोग न करें। ऐसे वक्त बर्तन या कपड़े धोने का जोखिम भी न मोल लें।
अगर किसी पानी वाली जगह से तो तुरंत बाहर निकलें। पानी में छोटी नाव, स्विमिंग पूल, झील, नदी या जल के किसी भी अन्य स्रोत में नाव आदि पर सवार हैं तो तुरंत वहां से निकल जाएं।
जब आप इलेक्ट्रिक चार्ज (बिजली) के आवेश में आते हैं तो बाल या रोएं खड़े हो जाते हैं, ऐसे में तुरंत ही जमीन पर लेट जाएं। वज्रपात जानवरों के लिए भी खतरा है, पेड़ के नीचे बारिश से बचने को खड़े जानवरों पर अक्सर बिजली जानलेवा साबित होती है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal





